पश्चिम बंगाल में शुक्रवार सुबह भूकंप के तेज झटके महसूस हुए हैं, इसकी तीव्रता 5.6 दर्ज की गई है। भूकंप का केंद्र बांग्लादेश के दुंगी में था, लेकिन झटके कोलकाता तक महसूस किए गए। सुबह 10 बजकर 10 मिनट पर भूकंप के झटके लगे और लोग डरे-सहमे घर से बाहर निकले। अभी के लिए किसी भी तरह के नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन तीव्रता क्योंकि थोड़ी ज्यादा रही, इस वजह से लोग परेशान हो गए।
यूरोपियन-मेडिटेरेनियन सीस्मोलॉजी सेंटर के अनुसार भूकंप का एपिसेंटर बांग्लादेश के टुंगी से लगभग 27 किलोमीटर पूर्व में था। इसकी गहराई करीब 10 किलोमीटर बताई गई है। झटके कोलकाता के साथ आसपास के जिलों और उत्तर बंगाल में भी महसूस किए गए। कूचबिहार और दिनाजपुर में भी भूकंप के तेज झटके दर्ज किए गए।
कौन सा भूकंप कितना ताकतवर?
भारत का 59 फीसदी हिस्सा भूकंप के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है, यहां भी नवंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच में कुल 159 भूकंप आ चुके हैं। Bureau of Indian Standards (BIS) ने भारत को भूकंप के लिहाज से 4 जोन में बांट रखा है, इसे Seismic Zone भी कहा जाता है।
| Seismic Zone | Risk Level | Major Areas |
| Zone V | Highly active | हिमालयी क्षेत्र, उत्तर-पूर्व, कच्छ, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह |
| Zone IV | High | दिल्ली, जम्मू और कश्मीर के कुछ हिस्से, हरियाणा, बिहार, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश |
| Zone III | Moderate | महाराष्ट्र, गुजरात, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल |
| Zone II | Low | डेक्कन प्लेट्यू, मध्य भारत |
भूकंप से निपटने के लिए क्या कदम?
अब भारत की तमाम सरकारों को इस बात का अहसास है कि देश में एक तेज तीव्रता वाला भूकंप आ सकता है। ऐसे में कई कदम उठाए गए हैं। उदाहरण के लिए 2014 तक अगर सिर्फ 80 Seismic Observatories रहती थीं, 2025 तक वो आंकड़ा बढ़कर 168 हो चुका है। इसी तरह पूरे देश में Earthquake Early Warning System शुरू करने की तैयारी है। उत्तराखंड में तो साल 2021 में ही Earthquake Early Warning System आ चुका है। जो भी इसकी फाइडिंग होती है, उसे BhuDEV (Bhukamp Disaster Early Vigilante) ऐप पर भेजा जाता है।
अब एक तरफ तकनीक के सहारे भूकंप के खतरों से बचने की कोशिश है तो वहीं दूसरी तरफ लोगों को जागरूक करना भी जरूरी है। इसी वजह से NDMA ने इस साल मार्च में ही ‘आपदा का सामना’ नाम से एक जागरूकता अभियान शुरू किया था। इसे दूरदर्शन पर प्रसारित किया गया। इसी तरह साल 2016 में पीएम मोदी ने भी भूकंप की गंभीरता को समझा था और एक 10 प्वाइंट एजेंडा तैयार किया था। तब 2047 तक विकसित भारत बनाने के लिए इन कदमो को जरूरी माना गया था। इस लिस्ट में अर्ली वॉर्निंग सिस्टम शुरू करने से लेकर बीमा पॉलिसी में बड़े बदलाव करना तक शामिल था।
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