डिलीवरी ब्वॉय के रूप में काम करने वाले (गिग वर्कर्स) लोगों की मुश्किलों को लेकर पिछले कुछ दिनों में काफी बातें सोशल मीडिया, टीवी चैनलों और अखबारों के जरिये सामने आई हैं। गिग वर्कर्स को अपने कामकाज के दौरान किस तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, इसके लिए इंडियन एक्सप्रेस के रिपोर्टर सौम्येंद्र बारीक ने Zomato, Blinkit और Swiggy के डिलीवरी ब्वॉय के रूप में एक-एक दिन तक काम किया।
गिग वर्कर्स को किन परेशानियों का सामना करना पड़ता है, इस दौरान सौम्येंद्र बारीक ने क्या अनुभव किया, आइए, इसे 5 प्रमुख बिंदुओं में समझते हैं।
1- बहुत कम मजदूरी, काम ज्यादा
सौम्येंद्र ने तीन दिनों में 23 डिलीवरी पूरी कीं। इस दौरान उन्होंने 105 किमी स्कूटी चलाई और 15 घंटे से ज्यादा काम किया। सौम्येंद्र ने कुल 782 रुपये कमाए। 250 रुपये का पेट्रोल स्कूटी में डलवाने के बाद उनके पास 532 रुपये बचे। मतलब कि लगभग 34 रुपये प्रति घंटा, जो कि बहुत कम है। इसमें स्कूटी का रखरखाव, फोन बिल का खर्च, दिल्ली की सड़कों पर घंटों घूमना, ऑर्डर का इंतजार करना और बिल्डिंग्स तक भारी सामान ले जाने की मेहनत शामिल नहीं है।
2- किससे कितनी कमाई हुई?
Zomato से 6 डिलीवरी पर 355 रुपये, Blinkit से 11 डिलीवरी पर 313.27 रुपये, Swiggy से 6 डिलीवरी पर मात्र 114 रुपये मिले।
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3- जुर्माना लगाती हैं कंपनियां
Swiggy पर तीन ऑर्डर रिजेक्ट करने पर हर बार 30 रुपये का जुर्माना देना पड़ा। चौथे ऑर्डर को रिजेक्ट करने पर Swiggy ने अगले दिन तक रिपोर्टर का अकाउंट बंद कर दिया। हालांकि, Blinkit और Zomato पर कोई जुर्माना नहीं देना पड़ा लेकिन Zomato ने कुछ ऑर्डर रिजेक्ट करने पर अकाउंट 15 मिनट के लिए रोक दिया। गिग वर्कर्स का कहना है कि अगर वे लॉग आउट करते हैं या निर्धारित समय पर नहीं पहुंचते हैं तो ये दोनों प्लेटफॉर्म जुर्माना लगा देते हैं।
4- बहुत सारे काम का कोई भुगतान नहीं मिलता
डिलीवरी ब्वॉय का काम शुरू करने के लिए डिलीवरी बैग, कंपनी की वर्दी के लिए भी करीब 1,200-1,800 रुपये तक खुद ही खर्च करने पड़ते हैं। अगर कोई डिलीवरी ब्वॉय दिन में 12-14 घंटे ऐप पर नहीं रहता और कम से कम 25-30 डिलीवरी पूरी नहीं करता तो उसकी कमाई के मौके बहुत कम हो जाते हैं। डिलीवरी ब्वॉय को बहुत सारा काम ऐसा भी करना पड़ता है जिसके लिए उसे कोई पैसा नहीं दिया जाता। जैसे- किसी के ऑर्डर की पैकिंग करना, भारी सामान उठाना, ऊंची मंजिलों तक जाना आदि।
5- मॉनीटरिंग करता है ऐप
कंपनियों के ऐप से लगातार अलार्म बजते हैं, नोटिफिकेशन आते हैं और डिलीवरी ब्वॉय को निर्देश दिए जाते हैं जिससे काफी तनाव भी झेलना पड़ता है। कस्टमर की सुविधा के लिए गिग वर्कर्स को काफी मेहनत करनी पड़ती है जबकि इसके बदले उन्हें बहुत कम पैसे मिलते हैं।
केंद्र सरकार ने गिग वर्कर्स को श्रम कानूनों के अंतर्गत मान्यता दी है और 10-मिनट डिलीवरी पर भी रोक लगाने को कहा है। माना जा रहा है कि इससे गिग वर्कर्स को कुछ राहत जरूर मिलेगी।
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