लखनऊ के शिया मुसलमानों के बीजेपी से जुड़ने के कदम की कोलकाता के शिया इमामों ने आलोचना की है। उन्होंने कहा है कि लखनऊ के शिया मुसलमानों का फैसला पूरी कौम की नुमाइंदिगी नहीं करता। कोलकाता में शिया इमामों ने प्रेस कांफ्रेंस कर यह बात कही।मौलाना जकी हुसैन रिजवी ने कहा-लखनऊ में शिया मुसलमानों को बीजेपी से जुड़ने के लिए कैसे तैयार किया गया, इसके हमारे पास सुबूत है। एक भ्रष्ट नेता की इसमें भूमिका है।
इस समय बीजेपी में भ्रष्ट लोगों को शामिल करने का नया ट्रेंड चल निकला है।भ्रष्ट लोग कानूनी राहत पाने की कोशिश में बीजेपी से जुड़ रहे हैं।इस फैसले का शिया समुदाय से कोई लेना-देना नहीं है। एक और शिया धर्मगुरु मौलाना सैयद फिरोज हुसैन जैदी ने बीजेपी पर बांटने की राजनीति का इल्जाम मढ़ा। उन्होंने कहा-यह कहा जा रहा है कि शियाओं ने बीजेपी ज्वॉइन की, यह सही नहीं है। हर धर्म-समुदाय के लोगों में बीजेपी फूट डालने की कोशिश कर रही है।हम गैरराजनीतिक लोग हैं, हमें राजनीति से दूर रहना चाहिए।
बता दें कि 25 जून को राष्ट्रीय शिया समाज लखनऊ के बैनर तले हुए कार्यक्रम में 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए नरेंद्र मोदी के समर्थन का एलान किया गया था। इस दौरान लखनऊ के शिया मुस्लिमों ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का भी समर्थन किया था। जिसको लेकर राष्ट्रीय स्तर पर मुसलमानों में प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कोलकाता के शिया मुसलमान लखनऊ के शियाओं के इस निर्णय पर भड़क उठे और प्रेस कांफ्रेंस कर उन्होंने भड़ास निकाली। कहा कि लखनऊ के कुछ शिया मुसलमानों के निर्णय को पूरी शिया कौम का निर्णय नहीं माना जा सकता।

