भारत में कोरोना से हुई मौतों के सरकारी आंकड़ों पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। पिछले दिनों अमेरिकी अख़बार न्यूयार्क टाइम्स ने भी भारत सरकार के आंकड़ों को गलत ठहराते हुए संभावना जताई थी कि भारत की मौत का आंकड़ा 14 गुना तक ज्यादा हो सकता है। वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता का कहना है कि भारत में मौतों का आंकड़ा छिपाया गया है, लेकिन जो तस्वीर अमेरिकी अखबार ने दिखाई है वो सच से काफी परे है। उनका ये भी कहना है कि अमेरिका ने भी कोरोना के वास्तविक आंकड़े छिपाए हैं।
शेखर गुप्ता ने अपनी न्यूज वेबसाइट द प्रिंट के लिए लिखे एक लेख में लिखा है कि भारत में कोरोना के कारण हुई मौतों के आंकड़े कम बताए गए हैं। ऐसा हर जगह हुआ है। लेकिन हमारी स्थानीय नगर पालिकाओं, निकायों और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं का जो हाल है, उसके कारण यह उम्मीद की जाती है कि भारत में आंकड़े एक तिहाई कम करके बताए गए होंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि अब तक के अनुमान के मुताबिक अमेरिका में भी नौ लाख मौतें हुई हैं लेकिन सरकारी आंकड़ों में सिर्फ छह लाख ही बताया गया है।
शेखर गुप्ता ने लिखा कि पिछले दो महीने में कई भारतीय मौत के शिकार हुए, जिनमें से अधिकतर को बचाया जा सकता था। लेकिन उनका ये भी कहना है कि जो तस्वीर अमेरिकी अखबार ने दिखाई वो तथ्य़ों से परे है। अगर ऐसा है तो पिछले साल केवल 2 लाख लोग मरे थे तो क्या पिछले सात सप्ताहों में 40 लाख लोग मरे? यह तो बंटवारे के बाद दो वर्षों में मारे गए लोगों की संख्या से भी दोगुनी है।
बता दें कि 25 मई को न्यूयार्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि जो आंकड़ा सरकार दे रही है वो हकीकत से बहुत ज्यादा उलट है। सरकारी आंकड़ों में मरने वाले लोगों की तादाद 3.07 लाख बताई गई जबकी न्यूयार्क टाइम्स के मुताबिक ये आंकड़ा 14 गुना ज्यादा भी हो सकता है। न्यूयार्क टाइम्स के द्वारा ग्राफिक्स के जरिए दिखाए में आंकड़ों में यह संभावना जताई गई थी कि भारत में जो आंकड़ा दिखाया जा रहा है वो सवालों के दायरे में है।

