कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को संसद के बाहर पत्रकारों से कहा, ‘मुझे असम के बारपेटा में सतारा मठ में आरएसएस के लोगों ने अंदर जाने से रोका। वो कौन होते हैं मुझे रोकने वाले?’ राहुल गांधी ने सोमवार को कहा, ‘जब मैं मंदिर गया तो मेरे सामने महिलाओं को खड़ा कर दिया गया। वे मुझसे कह रही थीं कि आप मंदिर के भीतर नहीं जा सकते हैं।’ वहीं, मठ के प्रमुख बशिष्ठ शर्मा ने कहा कि राहुल को किसी ने नहीं रोका, उल्टे उन्होंने उनके स्वागत के लिए चार घंटे इंतजार किया था। शर्मा ने बारपेटा से फोन पर बताया, ‘यह बात सरासर गलत है कि राहुल गांधी का कोई विरोध हुआ था या उन्हें मठ में घुसने से रोका गया था। शनिवार को मैं खुद चार घंटे तक मठ के गेट पर उनका स्वागत करने के लिए खड़ा रहा था। पूर्व मुख्यमंत्री भूमिधर बर्मन और कई अन्य कांग्रेसी नेता भी वहां मौजूद थे और मुझसे बातें करते रहे थे।’ उन्होंने बताया कि मठ में सुबह की प्रार्थना के वक्त वैसे रोज करीब हजार लोग रहते हैं। शनिवार को राहुल के आने के चलते वहां ज्यादा संख्या में लोग मौजूद थे। लेकिन राहुल दूसरे रास्ते से निकल गए और मठ में आए नहीं। इससे वहां मौजूद लोग काफी निराश हुए थे। भूमिधर बर्मन और अन्य कांग्रेसी नेताओं को यह बात राहुल गांधी को बतानी चाहिए।
राहुल शनिवार को दो दिन के असम दौरे पर गए थे। उन्होंने बारपेटा शहर से मेधिरतारी तक सात किमी लंबी पदयात्रा की थी और इसके अंत में सभा को संबोधित किया था। बशिष्ठ शर्मा ने बताया कि पदयात्रा खत्म करने के बाद राहुल दोपहर में 3.30 बजे सतारा मठ गए थे। उनके साथ मुख्यमंत्री तरुण गोगोई और असम कांग्रेस अध्यक्ष अंजन दत्ता भी थे। शर्मा के मुताबिक उन्हें यह जानकारी मठ की मैनेजिंग कमेटी के एक अधिकारी ने दी। राहुल के आरोपों पर आरएसएस ने भी प्रतिक्रिया दी है। आरएसएस का कहना है कि असम में विधानसभा चुनाव नजदीक आते देख कर मुख्यमंत्री तरुण गोगोई झूठी कहानी गढ़ रहे हैं। गुवाहाटी स्थित आरएसएस के राज्य मुख्यालय केशव धाम के एक अधिकारी ने कहा कि आरएसएस उन्हें क्यों रोकेगा? सतारा मठ आरएसएस नहीं चलाता है। और राहुल पदयात्रा के बाद वहां गए भी थे।
सतारा मठ की स्थापना 1583 में माधवदेव ने की थी। वह और श्रीमंत शंकरदेव 16वीं शताब्दी के संत और सुधारक थे।
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