इंडियन रेलवे केटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (आईआरसीटीसी) और भारतीय रेल अपने यात्रियों से इन दिनों अधिक किराया वसूल रहे हैं। आरोप है कि वे टिकट के बेस फेयर को पांच (5) के गुणक में ‘राउंड ऑफ’ कर असल रकम से ज्यादा किराया लेते हैं। मान लीजिए कि एक टिकट का बेसफेयर 101 रुपए है, तो वह यात्री से अधिकतम गुणक 105 रुपए ले लेगा। गुजरात के रहने वाले दो लोगों ने इसकी भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) से शिकायत की, जिसके बाद भारतीय रेल व उसकी इकाई आईआरसीटीसी के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं।

अहमदाबाद के मीत शाह और राजकोट के आनंद रणपाड़ा का आरोप है कि रेलवे और आईआरसीटीसी दोनों ही वास्तविक आधार किराए पर पहुंचने के लिए किराए को पांच के गुणक में निकटतम ऊपरी अंक में तय करते हैं। इससे खासकर आनलाइन बुंकिंग में रेल टिकट बिक्री के लिए बाजार में अनुचित शर्तें थोपी जाती हैं।

प्रथम दृष्ट्या प्रतिस्पर्धा नियमों के उल्लंघन का मामला पाए जाने के बाद सीसीआई ने नौ नवंबर को अपने आदेश में जांच के आदेश दिए। जांच में मामले से जुड़े लोगों की संभावित भूमिका की भी जांच होगी। प्रतिस्पर्धा आयोग ने कहा, “ऐसा लगता है कि प्रतिवादी (रेल मंत्रालय और आईआरसीटी) बिना यथोचित कारण आनलाइन बुंकिंग में वास्तविक किराए को ‘राउंड आफ’ करते हैं।”

शिकायत के मुताबिक, ग्राहक पूरी तरह रेल मंत्रालय और आईआरसीटीसी पर निर्भर हैं और उसके बाद उसके द्वारा दी जाने वाली सेवाओं का कोई विकल्प नहीं है। हालांकि, दोनों इकाइयों ने कहा कि टिकट के मामले में खुदरा राशि लेने और देने से लेन-देन में लगने वाला समय बढ़ेगा। ऐसे में लेन-देन में लगने वाले समय में कमी लाने व यात्रियों को तीव्र सेवा देने के लिए किराए को ‘राउंड आफ’ करने का फैसला किया गया। (भाषा इनपुट्स के साथ)