पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली AIMIM को तगड़ा झटका लगा है। शनिवार को सूबे में पार्टी के एक्टिंग चीफ एसके अब्दुल कलाम ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की लीडरशिप वाली TMC ज्वॉइन कर ली। कलाम के साथ इस दौरान एआईएमआईएम के कुछ और नेता भी दल छोड़ कर टीएमसी में चले गए। समाचार एजेंसी पीटीआई को कलाम ने बताया, ‘जहरीली हवा’ किनारे रहे/उनसे दूर रहे, इसलिए उन्होंने पाला बदल लिया।
AIMIM नेता और उनके समर्थक पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य की उपस्थिति में टीएमसी में शामिल हुए। कोलकाता में टीएमसी मुख्यालय में पार्टी में शामिल होने के बाद कलाम ने कहा कि पश्चिम बंगाल में कई वर्षों से शांति और अमन का माहौल है। उन्होंने “जहरीली हवा” को दूर रखने के पार्टी बदली है। एसके अब्दुल कलाम ने कहा कि हमने देखा है कि पश्चिम बंगाल शांति का नजारा हुआ करता था। लेकिन देर से ही सही यहां की हवा जहरीली हो गई है और इसे ठीक करना है। इसीलिए मैंने तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने का फैसला किया।
कलाम ने कहा कि एआईएमआईएम को पहले से पश्चिम बंगाल में प्रवेश करने की कोशिश करनी चाहिए थी। यह समय राज्य में पॉलिटिकल एंट्री के लिए ठीक नहीं है। विधानसभा चुनाव से पहले असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के लिए यह पहला झटका नहीं है। पार्टी को नवंबर में उस समय भी झटका लगा था जब राज्य में उनके प्रमुख नेता अनवर पाशा ने अपने समर्थकों के साथ ममता की पार्टी का दामन थाम लिया था। अनवर का दावा था कि ओवैसी की पार्टी भाजपा को सिर्फ वोटों का ध्रुवीकरण करने में मदद करेगी।
पाशा ने तब कहा था कि राज्य के मुसलमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ हैं और वही (ममता) एकमात्र सेक्युलर नेता हैं, जो भाजपा से मुकाबला कर सकती हैं। पाशा ने कहा कि बंगाल की 30 फीसद जनसंख्या मुसलमान है और बिहार में जो भी राजनीतिक घटनाक्रम हुआ, उसे इस राज्य में नहीं दोहराया जा सकता है।
किसान तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग पर अड़े हुए हैं। इस बीच, दिल्ली की सीमाओं पर किसानों के धरना प्रदर्शन के मामले में याचिकाकर्ता ऋषभ शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में नया हलफनामा दायर किया है। अर्जी में कहा कि किसानों को सीमा से हटाया जाए। रास्ता जाम कर प्रदर्शन करना शाहीनबाग मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी किए गए दिशा निर्देश के खिलाफ है।
याचिकाकार्ता ने अपनी अर्जी में कहा कि प्रदर्शन और रास्ता जाम होने की वजह से हर रोज़ 3,500 करोड़ का नुकसान हो रहा है। कच्चे माल की कीमत 30 फीसदी तक बढ़ चुकी है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने पिछले अंतरिम आदेश में कहा था कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण होना चाहिए, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने मोबाइल टॉवर को नुकसान पहुंचाया है। ये सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन है। अर्जी पर सोमवार को शीर्ष न्यायालय में सुनवाई होनी है।

