कांग्रेस के भीतर एक बार फिर घमासान मचा हुआ है। वर्किंग कमेटी की बैठक में पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने चिट्ठी लिखी है वो भारतीय जनता पार्टी के साथ मिले हुए हैं। जिसके बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने इस्तीफे की पेशकश की है। इसे लेकर एआईएमआईएम के हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी अपनी प्रतिकृया दी है और आज़ाद पर हमला बोला है।

ओवैसी ने ट्विटर पर लिखा “गुलाम नबी साहब मुझपर यही आरोप लगाते थे। अब आपपर भी यही आरोप लगा है। 45 साल की गुलामी सिर्फ इसलिए? अब ये साबित हो गया है कि जनेऊधारी लीडरशिप का विरोध करने वाला बी-टीम ही कहलाया जाएगा। मुझे उम्मीद है कि मुस्लिम समुदाय के लोग समझेंगे कि कांग्रेस के साथ रहने से क्या होता है। AIMIM प्रमुख ने आगे कहा “गुलाम नबी आज़ाद जब कभी हैदराबाद आते मुझपर और मेरी पार्टी पर इल्जाम लगाते कि आप भाजपा का साथ दे रहे हैं भाजपा की ‘बी’ टीम हैं। आज उनकी पार्टी के राहुल गांधी ने उन्हें कहा है कि आपने पार्टी लेटर पर साइन कर भाजपा का साथ दिया।”

राहुल गांधी ने उन नेताओं के खिलाफ नाराजगी जाहिर की है, जिन्होंने चिट्ठी लिखकर कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल खड़े किए थे। राहुल ने कहा था कि सोनिया गांधी के अस्पताल में भर्ती होने के समय ही पार्टी नेतृत्व को लेकर पत्र क्यों भेजा गया था? तहूल ने पत्र की टाइमिंग पर सवाल खड़े करते हुए पूछा कि जब पार्टी राजस्थान में संकट का सामना कर रही थी। तब पत्र क्यों लिखा गया। राहुल ने कहा “पत्र में जो लिखा गया था उस पर चर्चा करने का सही स्थान सीडब्ल्यूसी की बैठक है, मीडिया नहीं।”

राहुल के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी ने चिट्ठी की आलोचना की है। दूसरी तरफ, वरिष्‍ठ कांग्रेस नेता कपिल सिब्‍बल ने ट्विटर इंटरो से कांग्रेस हटा दिया है। उन्‍होंने राहुल के बीजेपी मिलीभगत वाले आरोप पर तीखे शब्‍दों में ट्वीट भी किया था जिसे बाद में डिलीट कर दिया।