पंजाब कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने जाट सिखों के वर्चस्व को चुनौती दी है। चन्नी के इन तेवरों से पार्टी के भीतर हड़कंप मच गया है। हुआ यह कि शनिवार को चंडीगढ़ में पंजाब कांग्रेस के दलित प्रकोष्ठ की बैठक थी।
इस बैठक में जालंधर से सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने पार्टी की प्रदेश इकाई में जाट सिखों की तुलना में दलित नेताओं की कम भागीदारी का सवाल पूरी मजबूती से उठाया।
बैठक में कांग्रेस के एससी विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम, पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग सहित तमाम बड़े नेता मौजूद थे।
बैठक में तब हंगामा हुआ जब चरणजीत सिंह चन्नी ने बोलना शुरू किया। बैठक में मौजूद कांग्रेस के एक नेता के मुताबिक, चन्नी ने प्रदेश अध्यक्ष, विपक्ष के नेता और एनएसयूआई अध्यक्ष जैसे बड़े पदों पर दलित नेताओं को नियुक्त न करने के लिए कांग्रेस की कड़ी आलोचना की। मौजूदा वक्त में यह तीनों ही पद जाट सिख नेताओं के पास हैं।
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दलित नेताओं को दरकिनार करने का आरोप
चरणजीत सिंह चन्नी ने शिकायत की कि अहम पदों पर नियुक्तियां करते वक्त दलित नेताओं को दरकिनार किया जा रहा है और अब जब विधानसभा चुनाव नजदीक हैं तो यह उम्मीद की जा रही है कि दलित नेता ही सारा काम करेंगे। चरणजीत सिंह चन्नी के एक समर्थक के मुताबिक, बैठक में मौजूद दलित समुदाय के सभी नेताओं ने चन्नी का पूरा समर्थन किया और उनके समर्थन में नारे लगाए।
बंद करना पड़ा माइक
चरणजीत सिंह चन्नी ने इस बात पर जोर दिया कि बड़े पदों पर नियुक्तियों में दलित समुदाय की हिस्सेदारी राज्य में उनकी संख्या के अनुपात में होनी चाहिए। बैठक में मौजूद एक कांग्रेसी नेता ने बताया कि चन्नी के बयान से पीसीसी अध्यक्ष वड़िंग शर्मिंदा हो गए और उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर पार्टी के दूसरे मंचों पर चर्चा की जाएगी।
हालात ये हो गए कि चरणजीत सिंह चन्नी आगे ना बोल सकें इसके लिए उनका माइक बंद करना पड़ा।
चन्नी को दी कांग्रेस नेता ने चुनौती
यह भी बात सामने आई है कि चरणजीत सिंह चन्नी और जंडियाला के पूर्व विधायक सुखविंदर सिंह डैनी बंडाला के बीच जुबानी जंग हुई। बंडाला ने चन्नी के बयानों को चुनौती दी और कहा कि पार्टी ने उन्हें पंजाब विधानसभा में विपक्ष का नेता और मुख्यमंत्री बनाया और अभी भी वह कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य हैं।
सीएम फेस बनना चाहते हैं चन्नी
पंजाब में 2027 की शुरुआत में विधानसभा के चुनाव हैं और चरणजीत सिंह चन्नी खुद को पार्टी के मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर आगे कर रहे हैं जबकि पार्टी ने इसे लेकर किसी तरह का कोई उत्साह नहीं दिखाया है। पंजाब के प्रभारी भूपेश बघेल ने हाल ही में कहा था कि विधानसभा चुनाव में पार्टी किसी भी नेता को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं करेगी।
पंजाब में कांग्रेस ने 2017 से 2022 के अपने कार्यकाल के दौरान सोशल इंजीनियरिंग का सहारा लिया था। 2021 में कैप्टन अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटाए जाने के बाद चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब का पहला दलित सिख मुख्यमंत्री बनाया गया था। यह माना गया था कि पार्टी ने ऐसा करके 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले दलित समुदाय को एकजुट करने की कोशिश की है।
पंजाब में सबसे बड़ा जाति समूह है दलित समुदाय
पंजाब में दलित समुदाय सबसे बड़ा जाति समूह है और इसकी आबादी लगभग 34% है लेकिन पार्टी की यह रणनीति कारगर साबित नहीं हुई। कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई और चन्नी जिन दो विधानसभा सीटों से चुनाव लड़े, दोनों ही जगह उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
पंजाब कांग्रेस में जाट सिख समुदाय का दबदबा रहा है और यह काफी हद तक आज भी बना हुआ है। हालांकि कांग्रेस 2021 के बाद से दलित, हिंदू और ओबीसी मतदाताओं तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है लेकिन पंजाब कांग्रेस में आज भी जाट सिख काफी प्रभावशाली हैं।
