चंडीगढ़ में स्वतंत्र प्रशासक नियुक्त करने के केंद्र के प्रस्ताव को लेकर पंजाब का राजनीतिक माहौल बेहद गर्म है। इसे लेकर बीजेपी को जबरदस्त आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। पंजाब बीजेपी के अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने रविवार को कहा है कि वह इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलेंगे।
जाखड़ ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘मैंने मुलाकात के लिए केंद्रीय गृह मंत्री से समय मांगा है।’ जाखड़ ने कहा कि वह चाहते हैं कि प्रस्ताव से जुड़ा फैसला वापस लिया जाए।
जाखड़ ने कहा, ‘चंडीगढ़ की प्रशासनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए पंजाब की भावनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। चंडीगढ़ सिर्फ एक भौगलिक हिस्सा नहीं है। पंजाब की भावनाएं इससे जुड़ी हैं। इस बारे में कोई भ्रम नहीं होना चाहिए।”
‘चंडीगढ़ पर हम कोई विधेयक लेकर नहीं आ रहे’
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, ‘चंडीगढ़, पंजाब का अहम हिस्सा है और भाजपा की पंजाब इकाई राज्य के हितों के साथ मजबूती से खड़ी है, फिर चाहे वह चंडीगढ़ का मुद्दा हो या पंजाब के पानी का। चंडीगढ़ को लेकर जो भी भ्रम की स्थिति है, उसे सरकार से बातचीत करके सुलझा लिया जाएगा। मैं खुद पंजाबी हूं, इसलिए मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि हमारे लिए पंजाब हमेशा सबसे पहले आता है।’
क्या है यह मामला?
केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ को संविधान के अनुच्छेद 240 के दायरे में लाने का प्रस्ताव किया है, जो राष्ट्रपति को केंद्र शासित प्रदेश के लिए नियम बनाने और सीधे कानून बनाने का अधिकार देता है। लोकसभा और राज्यसभा के बुलेटिन के अनुसार, केंद्र एक दिसंबर से शुरू होने वाले संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2025 लाएगी। अगर विधेयक पारित हो जाता है, तो चंडीगढ़ में स्वतंत्र प्रशासक की नियुक्ति की जा सकती है।
ठीक उसी तरह जैसे पहले स्वतंत्र मुख्य सचिव होता था। चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा की संयुक्त राजधानी है।
पंजाब में सरकार चला रही आम आदमी पार्टी (आप) के अलावा कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की आलोचना की और आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पंजाब से चंडीगढ़ को छीनने की कोशिश कर रही है।
केंद्र सरकार का आया बयान
हंगामे के बाद केंद्र सरकार ने रविवार को कहा कि उसका संसद के शीतकालीन सत्र में चंडीगढ़ के प्रशासक को लेकर किसी भी प्रकार का कोई विधेयक पेश करने का इरादा नहीं है। केंद्र सरकार ने भरोसा दिलाया कि यह प्रस्ताव किसी भी तरह से चंडीगढ़ के शासन या प्रशासनिक ढांचे को बदलने की कोशिश नहीं करता है।
वर्तमान में पंजाब के राज्यपाल ही चंडीगढ़ के प्रशासक की जिम्मेदारी संभालते हैं। एक नवंबर 1966 को पंजाब के पुर्नगठित होने से पहले चंडीगढ़ की प्रशासनिक जिम्मेदारी स्वतंत्र रूप से मुख्य सचिव पर ही थी।
Explained: चंडीगढ़ का इतिहास, पंजाब-हरियाणा के दावे और केंद्र का प्रस्तावित विधेयक
