रक्षा मंत्रालय ने देश में अत्याधुनिक एके-203 राइफलें निर्मित करने की परियोजना को हरी झंडी दे दी है। रूसी कंपनी कलाश्निकोव और भारत सरकार के आयुध कारखाना बोर्ड के बीच संयुक्त उपक्रम के तहत उत्तर प्रदेश के अमेठी के कोरवा में प्लांट लगाया जाएगा। केंद्र की महत्त्वाकांक्षी मेक इन इंडिया परियोजना के तहत भारतीय सेना के लिए कुल 7.47 लाख ऐसी राइफलें बनाई जाएंगी। संयुक्त उपक्रम में रूसी कंपनी की हिस्सेदारी 49.5 फीसदी और आयुध कारखाना बोर्ड की हिस्सेदारी 50.5 फीसद होगी।
संयुक्त उपक्रम के मसविदे पर 15 फरवरी को दस्तखत किए जाएंगे। कोरवा प्लांट में 7.62739 मिलीमीटर कैलिबर वाले एके-203 राइफलें बनाई जाएंगी। इस परियोजना का शिलान्यास प्रधानमंत्री मोदी 28 फरवरी को करेंगे। एके-103 एके-47 राइफल की तीसरी पीढ़ी की राइफल हैं। भारतीय सेना के एक सेवारत मेजर जनरल को कोरवा कारखाने का प्रमुख बनाया गया है। यह सौदा 12,000 करोड़ रुपए का है।
एके-203 राइफलों के बारे में किए गए इस फैसले से दो दिन पहले मंगलवार को भारत ने अमेरिका के साथ राइफल खरीद के एक सौदे पर दस्तखत किए। इसके तहत अमेरिकी कंपनी एसआइजी सोएर त्वरित खरीद योजना के तहत 7.62७51 मिलीमीटर कैलिबर वाली 72,400 नई राइफलों की आपूर्ति भारतीय सेना को करेगी। यह सौदा 647 करोड़ रुपए का है। अमेरिकी राइफलें चीन और पाकिस्तान से लगती सीमा चौकियों पर तैनात सैनिकों को दी जाएंगी। फिलहाल भारत में सैन्य बलों को 5.56745 मिलीमीटर इनसास राइफलें मिलती हैं।
