प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार (31 अक्टूबर) को गुजरात में नर्मदा नदी के किनारे ‘लौह पुरुष’ और ‘भारत के बिस्मार्क’ नाम से विख्यात देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल की 182 मीटर ऊंची प्रतिमा का अनावरण किया। इसे ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ का नाम दिया गया है। यह दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है। इसे रिकॉर्ड 33 महीनों में तैयार कर लिया गया। पीएम मोदी ने 31 अक्टूबर, 2013 को दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति बनाने की आधारशिला रखी थी। इससे एक महीने पहले सितंबर में उन्हें वर्ष 2014 में होने वाले आम चुनाव के लिए बीजेपी का चेहरा चुना गया था। बताया जाता है कि उस वक्त मोदी शहरी क्षेत्रों में एक जाना-पहचाना चेहरा बन चुके थे, लेकिन ग्रामीण इलाकों में वह उतना लोकप्रिय नहीं थे। उस वक्त गुजरात के मुख्यमंत्री रहे मोदी ने सरदार पटेल की प्रतिमा बनाने के अभियान को देशभर में अपने लिए समर्थन जुटाने का जरिया बनाने की रणनीति बनाई। जेडीयू के मौजूदा उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर उस वक्त नरेंद्र मोदी के प्रचार अभियान के मुख्य रणनीतिकार थे।
‘लौह दान अभियान’: सरदार पटेल की 182 मीटर ऊंची प्रतिमा बनाने के लिए हजारों करोड़ टन लोहे और अन्य धातु की जरूरत थी। नरेंद्र मोदी और उनके रणनीतिकारों ने ‘ब्रांड मोदी’ को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए मूर्ति निर्माण के लिए ‘लौह दान अभियान’ की शुरुआत की। इसके तहत देशभर के 2.5 लाख ग्राम पंचायतों से संपर्क साधने की योजना तैयार की गई। बीजेपी नेता और कार्यकर्ता संबंधित पंचायतों के सरपंचों और अन्य जनप्रतिनिधियों से संपर्क कर कार्यक्रम आयोजित करने लगे। इसके तहत पंचायत में बार कोड लगे डब्बे बांटे गए, ताकि लोग इसमें लोहा रखकर बीजेपी कार्यकर्ताओं को दान कर सकें। आम लागों को बताया गया कि इस लोहे को गलाकर पटेल की ऐतिहासिक प्रतिमा में इस्तेमाल किया जाएगा। साथ ही इस बात की भी जानकारी दी गई थी कि पंचायत के लोग गुजरात में बनने वाली प्रतिमा के समीप स्थापित होने वाले संग्रहालय में जाकर अपने सरपंच की तस्वीर देख सकेंगे। यहां यह गौरतलब है कि पूरे अभियान को नरेंद्र मोदी के बजाय गुजरात सरकार के नाम से चलाया गया। हालांकि, गुजरात के मुख्यमंत्री होने के नाते मोदी ने 2 लाख सरपंचों को इस बाबत चिट्ठी लिखी थी। लौह दान के जरिये लोहा जुटाने का कैंपेन 15 दिसंबर, 2013 से फरवरी 2014 तक चला था। इस अभियान के लिए 3 मिनट का वीडियो बनाया गया था, जिसमें मोदी महज कुछ सेकेंड के लिए ही दिखे थे। इस रणनीति का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले ग्रामीण क्षेत्रों में भी मोदी एक जाना-पहचाना चेहरा और नाम हो गए थे। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो मोदी के प्रधानमंत्री बनने में इस ‘साइलेंट कैंपेन’ का बड़ा योगदान था।
2019 के चुनावों में फायदे की आस: नरेंद्र मोदी ने सत्ता में आने के साढ़े चार साल बाद 31 अक्टूबर, 2018 को सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा का अनावरण किया। दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा को रिकॉर्ड 33 महीनों में पूरा कर लिया। साल के अंत तक 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं और अगले साल आम चुनाव भी प्रस्तावित है। वर्ष 2019 के चुनावों के लिहाज से सरदार पटेल की मूर्ति का अनावरण बेहद महत्वपूर्ण है। हार्दिक पटेल पिछले कुछ महीनों से पटेलों को बीजेपी के खिलाफ एकजुट करने में कुछ हद तक सफल रहे हैं। वह इस समुदाय के लिए लगातार आरक्षण की मांग कर रहे हैं। इससे मोदी को अपने ही राज्य में असहज स्थितियों का सामना करना पड़ा है। विधानसभा चुनावों में बीजेपी 100 का भी आंकड़ा नहीं छू सकी थी। सरदार पटेल की दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा बनवाकर बीजेपी पटेलों को अपनी तरफ आकर्षित करने की कोशिश कर सकती है। इसके अलावा मूर्ति के लिए लोहा दान करने वाले 1.69 लाख ग्राम पंचायतों को भी मोदी से जोड़ने का प्रयास किया जा सकता है। यदि बीजेपी और मोदी ऐसा करने में सफल रहे तो 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों में अप्रत्याशित फायदे से इंकार नहीं किया जा सकता है।

