एक वकील और उसके पति को हवालात में डालने वाली नागपुर पुलिस की तब हालत पतली हो गई जब महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग ने आदेश दिया कि पहले तो पुलिस वकील को 2.5 लाख रुपये का मुआवजा दे। फिर डीजीपी एक समय अंतराल तय करके बार-बार अपने मुलाजिमों को ये सिखाएं कि लोगों से कैसा बर्ताव किया जाता है।

आयोग इस बात से खासा नाराज था कि वकील पुलिस के पास अपनी शिकायत लेकर गई थी। लेकिन पुलिस ने उलटा उसे ही हवालात में डाल दिया। उसके पति को भी नहीं बख्शा गया। उसके भी महिला वकील के साथ हवालात काटनी पड़ी। आयोग का कहना था कि पुलिस की हरकत से एडवोकेट का मान सम्मान सब कुछ छिन गया। वो समाज में एक रुतबा रखते थे उनको शर्मसार होना पड़ा गया। आयोग ने इतनी चपत लगाने के बाद भी पुलिस को नहीं बख्शा। उसका कहना था कि वकील चाहे तो पुलिस के खिलाफ आपराधिक केस भी कर सकती हैं।

शिकायत लेकर थाने पहुंची थीं अंकिता पर पुलिस ने उनको ही डाल दिया भीतर

नागपुर में रहने वाली अंकिता मखीजा और उनके पति निलेश के साथ पुलिस ने बदसलूकी की थी। दोनों अपने पड़ोसी के खिलाफ शिकायत लेकर पुलिस के पास पहुंचे थे। उनकी शिकायत थी कि पड़ोसी ने उनके कुत्ते पर पत्थर फेंका। पुलिस उलटा उनको ही परेशान कर दिया। वकील ने नागपुर के पुलिस कमिश्नर को इस सारे मामले की शिकायत की थी।

नागपुर पुलिस कमिश्नर बोले- विभागीय जांच बिठाई तो भड़का आयोग

कमिश्नर ने जवाब में माना कि शिकायत आई थी। जिन मुलाजिमों ने वकील और उनके पति को परेशान किया था उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा रही है। आयोग का सवाल था उनके खिलाफ आपराधिक केस दर्ज करके कोई एक्शन क्यों नहीं लिया गया। अगर उन पर कोई केस दर्ज करके विभागीय कार्रवाई भी चलाई जाती तो कुछ गलत नहीं था। आपराधिक केस दर्ज होने के बाद या तो वो बरी होते या फिर उनको सजा मिलती। इसमें कहीं भी कुछ गलत नहीं होता।