चार्जशीट वाले नेताओं के चुनाव लड़ने के मामले पर मंगलवार (25 सितंबर) को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया। कोर्ट ने दो टूक कहा कि संसद, राजनीति में अपराधियों को आने से रोके। कोर्ट ने इसके साथ ही संसद पर कानून बनाने की जिम्मेदारी छोड़ी और साफ किया कि अगर उम्मीदवार दोषी करार हुए, तभी उनके चुनाव लड़ने पर बैन लगेगा। कोर्ट का कहना था कि किसी भी हालत में व्यवस्था भ्रष्टाचार का शिकार न बने। फैसले के दौरान कोर्ट ने बताया कि राजनेताओं को अपने आपराधिक रिकॉर्ड का ब्योरा देना जरूरी होगा। सभी पार्टियों को इस बाबत अपनी वेबसाइट पर जानकारी भी अपलोड करनी पड़ेगी।
आपको बता दें कि दागी राजनेताओं के चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है, जिसमें याचिकाकर्ता ने कोर्ट में गुहार लगाई थी कि जिन लोगों के खिलाफ आरोप तय हों और पांच साल या उससे अधिक की सजा का प्रावधान हो तो उन्हें चुनाव न लड़ने दिया जाए।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) दीपक मिश्रा ने उसी पर फैसला पढ़ते हुए कहा, “संसद सुनिश्चित करे कि राजनीति में दागी नेता या अपराधी न आएं। चार्जशीट के आधार पर जनप्रतिनिधियों के चुनाव लड़ने पर रोक नहीं लगाई जा सकती। यह संसद का काम है कि वह कानून बनाए।”
वहीं, वकील ए.उपाध्याय ने एएनआई को बताया कि कोर्ट ने अपने आदेश में चुनाव आयोग को आदेश दिया है कि हर उम्मीदवार को चुनाव आयोग को अपने डिटेल्स देने होंगे, जिन्हें बाद में आयोग अपनी वेबसाइट पर अपलोड करेगा, जबकि उम्मीदवार को अपने अपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी संबंधित राजनीतिक पार्टी को देनी होगी, जिसे वह इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट या स्थानीय मीडिया में चुनाव की तारीख से पहले प्रकाशित या प्रसारित कराएगी।
कोर्ट के मुताबिक, उम्मीदवार और राजनीतिक पार्टी को आपराधिक रिकॉर्ड के बारे में व्यापक स्तर पर चीजें सार्वजनिक करनी होंगी। उन्हें बड़े स्तर पर प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र में इस संबंध में विज्ञापन छपवाना होगा। नामांकन दाखिल करने के बाद तीन बार यह काम करना जरूरी होगा। सीजेआई के नेतृत्व वाली बेंच ने कहा कि भारतीय राजनीति में अपराधीकरण बढ़ रहा था। देश इसके लिए बेसब्री से कानून का इंतजार कर रहा है।
