जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बलूचिस्तान का मुद्दा उठाने के लिए आज केंद्र की निंदा करते हुए कहा कि यह मुद्दा ऐसे समय में उठाया गया है जबकि कश्मीर हिंसा से जूझ रहा है। उमर ने केंद्र पर कटाक्ष करते हुए ट्विटर पर पोस्ट किया, ‘‘कश्मीर में 24 घंटों में छह प्रदर्शनकारी मारे गए, जम्मू कश्मीर में हम इतना बढ़िया काम कर रहे हैं तो आइए अब बलूचिस्तान का मसला सुलझाएं।’ 12 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक के बाद केंद्र ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान सूबे में मानवाधिकार उल्लंघनों का मुद्दा उठाने का फैसला किया था।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को स्वतंत्रता दिवस पर अपने भाषण में भी बलूचिस्तान का जिक्र किया था। प्रधानमंत्री ने पड़ोसी देश पाकिस्तान को बेहद सख्त संदेश देते हुए और बलूचिस्तान व पाक अधिकृत कश्मीर के प्रति सहानुभूति जताते हुए कहा था कि उनकी सरकार हिंसा और आतंकवाद के आगे नहीं झुकेगी। बलूचिस्तान, गिलगिट और पाक अधिकृत कश्मीर के लोगों ने जिस तरह पूरे दिल से मेरा शुक्रिया अदा किया, जिस तरह से उन्होंने मेरे प्रति अपना आभार जताया और जिस तरह उन्होंने हाल ही में अपनी शुभकामनाएं भेजीं…उसके लिए मैं उनका शुक्रिया अदा करना चाहता हूं।’

बलूचिस्‍तान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयानों को आश्‍चर्यजनक बताते हुए बलूच राष्‍ट्रवादी नेता अकबर बुगती के पोते ब्रहमदग बुगती ने कहा कि वे इससे उत्‍साहित हैं। उन्‍होंने उम्‍मीद जताई कि भारत सरकार इस नीति को जारी रखेगी। बलूच रिपब्लिकन पार्टी के मुखिया बुगती ने बताया कि बलूच संघर्ष पर अगर बॉलीवुड फिल्‍म बनाता है तो अच्‍छा होगा।