कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जिम्मेदार ठहराते हुए आरोप लगाया कि मोदी ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई और जो ‘नौटंकी’ की, उस कारण ये हालात पैदा हुए। उन्होंने आगाह करते हुए यह भी कहा कि अगर मौजूदा गति से टीकाकरण हुआ तो आगे तीसरी, चौथी और पांचवीं लहर भी आएगी क्योंकि वायरस का स्वरूप बदलता जाएगा।
राहुल गांधी के इस बयान को लेकर ‘न्यूज़ 24’ के शो ‘राष्ट्र की बात’ पर एक बहस हो रही थी। इस दौरान पूर्व आप नेता और पत्रकार आशुतोष और जनता दल यूनाइटेड (JDU) प्रवक्ता अजय आलोक एक दूसरे से भीड़ गए। आलोक ने कहा “ये सोचे सभे इग्नोंरेंट हैं। वैक्सीन लगने के बाद भी इम्युनिटी आने में समय लगता है। अगर दिसंबर तक दोनों डोज़ लग जाएंगे फिर भी अगले मार्च तक कोरोना नहीं जाएगा। डबल्यूएचओ भी यही कह रहा है।”
जवाब में आशुतोष ने कहा “कोई डॉक्टर अगर इस तरह की बात करता है तो मुझे हैरानी होती है।” इसपर अजय आलोक बीच में बोलने लगे तो आशुतोष ने कहा “मैं आओके बारे में बात नहीं कर रहा हूं। बीच में मत बोलिए।” इसपर एंकर मानक ने कहा “अरे उन्हें बोलने तो दीजिये।”
इसपर जदयु प्रवक्ता ने कहा “आपकी दिक्कत ये है आशुतोष जी कि आप पत्रकार भी हैं, नेता भी हैं। मैं आपको क्यों बोलने दूं। आप कुछ भी बोल रहे हैं। इसपर आशुतोष ने कहा “अजय आलोक जी को पता नहीं यों मिर्ची लग गई। मैंने अभी तक उनका नाम भी नहीं लिया है। मैं इतना कहूँगा टीके का एक प्रोसेस होता है दो डोज़ का। जबतक दोनों नहीं लग जाते के पूरी तरह कंप्लीट नहीं होता। सिंगल डोज़ लगाओ, आधा लगाओ या मत लगाओ आपकी मर्जी। मैं कुछ कहा कह रहा हूँ।”
आशुतोष ने कहा “लेकिन देश की सरकार कहती है कि दिसंबर से पहले 216 डोज़ हो जाएंगे, लोगों को टीका लगा दिया जाएगा। इसका मतलब दिसंबर नहीं सितंबर तक होना चाहिए। क्या भारत सरकार 106 करोड़ लोगों को सितंबर तक वैक्सीन लगा पाएगी। सिंगल डोज़ लगाने की ऐसी कोई व्यवस्था है उनके पास? कहा है वैक्सीन? किस से ले रहे हो? कब आयेगा?”
बता ता दें राहुल गांधी ने कहा है कि सरकार को कोरोना से होने वाली मौतों को लेकर ‘झूठ बोलने’ की बजाय देश को सच्चाई बतानी चाहिए तथा विपक्ष के सुझावों को सुनकर और पूरे देश को साथ लेकर कोरोना वायरस से निपटने की रणनीति बनानी चाहिए। कांग्रेस नेता ने यह दावा भी किया कि प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार आज तक कोरोना वायरस एवं इसके स्वरूपों को नहीं समझ पाए तथा पिछले साल फरवरी में ही अगर कांग्रेस की बातों को सुन लिया होता तो लाखों लोगों की जान नहीं जाती।
