महाराष्ट्र में बृह्नमुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के चुनाव को लेकर राजनीतिक गहमागहमी तेज हो गई है। महायुति से लेकर विपक्षी महाविकास अघाड़ी में शामिल दल चुनावी रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं। इस बीच, मुंबई के शिया समुदाय ने राज्य के सेकुलर राजनीतिक दलों के सामने एक बड़ी मांग रख दी है।
शिया समुदाय का कहना है कि अगर उनके समुदाय के नेताओं को टिकट नहीं दिया गया तो शिया समुदाय की आबादी वाले इलाकों में सामूहिक रूप से नोटा का बटन दबाया जाएगा।
शिया समुदाय के अध्यक्ष आरिफ सैयद ने ‘द हिंदू’ से कहा, मुंबई में लगभग 20 लाख शिया मुसलमान रहते हैं लेकिन फिर भी मुंबई नगर निगम के गठन के बाद से अब तक किसी भी सेकुलर राजनीतिक दल ने हमारे समुदाय को प्रतिनिधित्व नहीं दिया।
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आरिफ सैयद ने बताया कि 1980 के दशक के बाद से किसी भी प्रमुख राजनीतिक दल ने शिया उम्मीदवार को मैदान में नहीं उतारा। उन्होंने मांग की है कि इस बार वार्ड 139 से किसी शिया समुदाय के नेता को टिकट दिया जाए।
राजनीतिक दलों को लिखा पत्र
सैयद का कहना है कि मुंबई के गोवंडी, मानखुर्द और शिवाजी नगर विधानसभा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर शिया आबादी रहती है। इसके अलावा मुंबई शिया यूथ ब्रिगेड ने भी सभी राजनीतिक दलों को पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि अगर उनकी और उपेक्षा की गई तो शिया समुदाय चुनाव का बहिष्कार भी करेगा और शिया बहुल सीटों में नोटा का बटन दबाएगा।
टिकट के अलावा शिया समुदाय ने कर्बला के लिए जमीन दिए जाने की मांग को दोहराया है।
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अकेले चुनाव लड़ेगी कांग्रेस
कांग्रेस ने हाल ही में ऐलान किया था कि वह बीएमसी के चुनाव में अकेले ही मैदान में उतरेगी जबकि इस बात की संभावनाएं जताई जा रही हैं कि उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना और उनके चचेरे भाई राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के बीच गठबंधन हो सकता है।
महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय के चुनाव 2 दिसंबर को होंगे और मतगणना तीन दिसंबर को होगी।
इस बीच, एनसीपी (शरद पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने कहा है कि उनकी पार्टी स्थानीय निकाय चुनाव के लिए सभी विपक्षी दलों को साथ लेकर चलना चाहती है और उनसे बातचीत करेगी। उन्होंने कहा कि अगले हफ्ते तस्वीर साफ हो जाएगी।
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