एक तरफ जहां हिमालय में मौसम के अनियमित पैटर्न और पर्यावरण के बिगड़ने पर चिंता जताई जा रही है, वहीं केंद्र सरकार ने कहा है कि उसने गंगोत्री और यमुनात्री क्षेत्र में 17,625 पेड़ों की कटाई को मंजूरी दे दी है। सरकार ने एनजीटी से यह भी कहा कि 2,800 से अधिक ग्लेशियरों और जल निकायों की निगरानी कर रही है। यह जवाब राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) द्वारा स्वतः संज्ञान लेते हुए जारी किए गए नोटिस के जवाब में दिया गया।
अक्टूबर में, एनजीटी की अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल की अध्यक्षता वाली मुख्य पीठ ने हिमालयी पारिस्थितिकी पर पर्यावरणीय चिंताओं को उठाने वाली एक समाचार रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया था। न्यायाधिकरण ने पर्यावरणीय मानदंडों के अनुपालन से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों का हवाला दिया था। न्यायाधिकरण ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, शहरी विकास एवं पर्यटन बोर्ड विभाग, उत्तराखंड सरकार और स्वच्छ गंगा राष्ट्रीय मिशन (एनएमसीजी) से जवाब मांगा था।
13 प्रस्तावों के लिए 17,000 पेड़ों की कटाई को मंजूरी
पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा एनजीटी के समक्ष दी गयी जानकारी के अनुसार, केंद्र की प्रमुख चारधाम सर्व-मौसम सड़क विस्तार परियोजना के तहत स्वीकृत 13 प्रस्तावों के लिए 2017 से 2020 के बीच 17,625 पेड़ों की कटाई को मंजूरी दी गई थी। हालांकि, केंद्र द्वारा इसमें भागीरथी पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र में सड़क खंडों के लिए हाल ही में दी गई वन भूमि के हस्तांतरण की मंजूरी का उल्लेख नहीं है जो उत्तराखंड राज्य सरकार के स्तर पर दी गई थी।
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अपने जवाब में, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने कहा कि पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना 2006 के अनुसार, सड़क विस्तार परियोजनाओं के लिए केंद्रीय या राज्य स्तरीय अधिकारियों द्वारा पूर्व पर्यावरण मंजूरी का मूल्यांकन किया जाता है। यह लंबाई, अतिरिक्त मार्ग की आवश्यकता या भूमि अधिग्रहण पर निर्भर करता है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि ईआईए अधिसूचना 2006 में 2022 में हुए संशोधन के बाद, नियंत्रण रेखा या सीमा से 100 किलोमीटर तक की सभी राजमार्ग परियोजनाओं को मानक संचालन प्रक्रिया के अनुपालन के अधीन छूट दी गई है।
मुरली मनोहर जोशी और करण सिंह ने योजनाओं पर पुनर्विचार करने की उठाई थी मांग
अगस्त 2025 में धारली में हुई त्रासदी के मद्देनजर, चारधाम परियोजना के तहत चल रहे विस्तार कार्यों की स्थानीय लोगों और पर्यावरणविदों ने आलोचना की है। भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी और पूर्व केंद्रीय मंत्री करण सिंह ने शेष कार्यों पर रोक लगाने और सड़क निर्माण योजनाओं पर पुनर्विचार करने की मांग की थी।
राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने एनजीटी के नोटिस के जवाब में कहा कि क्षेत्रीय तापमान वृद्धि के कारण भागीरथी और यमुना नदियों के जलग्रहण क्षेत्रों में ग्लेशियर पीछे हट रहे हैं। गंगोत्री और यमुनात्री राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए वन भूमि के उपयोग में बदलाव के कुल 13 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। उल्लंघनों और पर्यावरण के नुकसान से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अगस्त 2019 में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया था।
