लोकसभा चुनाव नजदीक हैं और हाल में राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणामों को देख केंद्र की मोदी सरकार चुनौतियों से निपटने के लिए नए सिरे से रणनीतियां बनाने में लग गई है। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक किसानों को साधने की चुनौती भी है। खबर है कि केंद्र सरकार नए साल में किसानों को तोहफा दे सकती है और इसके लिए कुछ विकल्पों पर विचार कर रही है। शुक्रवार (28 दिसंबर) को केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी दिल्ली में प्रेस वार्ता के दौरान किसानों के हितों के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है, आगे जो भी निर्णय लिया जाएगा, उसकी घोषणा की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक बम्पर पैदावार के बीच कम मुनाफे के कारण किसानों को होने वाली कठिनाइयों को दूर करने के लिए पिछले कुछ दिनों में कई दौर की बैठकें हुई हैं। तत्काल राहत पहुंचाने के लिए एक प्रस्ताव यह है कि तय तारीख के भीतर कृषि ऋण चुकाने वाले किसानों पर लगने वाले 4 प्रतिशत ब्याज दर को माफ कर दिया जाए।
वर्तमान में किसानों को 7 प्रतिशत ब्याज दर पर 3 लाख रुपये तक का अल्पकालिक कृषि ऋण मिलता है। हालांकि, किसान अगर कृषि ऋण नियत तारीख में ही चुका देते हैं तो उनसे केवल 4 फीसदी ब्याज लिया जाता है। आमतौर पर लोन 9 फीसदी ब्याज दर पर दिया जाता है। केंद्र द्वारा सामान्य मामलों में 2 प्रतिशत की ब्याज सब्सिडी और कृषि ऋणों की शीघ्र चुकाने के मामले में सालाना लगभग 15,000 करोड़ रुपये की लागत आती है। सरकार ने चालू वित्त वर्ष में किसानों को 11 लाख करोड़ रुपये का ऋण देने का लक्ष्य रखा है। पिछले वित्त वर्ष में किसानों को 11.69 लाख करोड़ रुपये का ऋण दिया गया जिसने 10 लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य को पार किया था।
सूत्रों के मुताबिक अगर कृषि ऋणों की तत्काल अदायगी के लिए ब्याज पूरी तरह से माफ कर दिया जाता है तो ब्याज का बोझ दोगुना होकर 30,000 करोड़ रुपये हो सकता है। इसके अलावा सरकार खाद्य फसलों पर पूरी तरह से छूट देकर और बागवानी फसलों पर कुछ कम छूट देकर किसानों के प्रीमियम बोझ को कम करने के लिए प्रधान मंत्री बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) को संशोधित करने पर विचार कर रही है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक 2019 के लोकसभा चुनाव में किसानों के मुद्दे अहम होंगे।

