देशभर में फैले राजमार्ग के खुले मैदानों में मोबाइल नेटवर्क गुल हो रहा है। टावरों की यह कमी चालकों को भटका रही है और दूसरी ओर सुरक्षा संकट भी पैदा कर रही है। इन संकटों से राजमार्ग प्रयोग करने वाले वाहन चालकों को राहत दिलाने के लिए ऐसे दुर्घटना वाले क्षेत्र (ब्लैक स्पाट) चिहिन्त किए गए हैं, ताकि वहां पर नेटवर्क बेहतर किया जा सके। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के मुताबिक इस योजना को लागू करने के लिए टेलीकाम कंपनियों की मदद ली जा रही है, इसका शुरुआती काम पूर्ण किया जा चुका है।
मंत्रालय का कहना है कि ये परेशानियां नए राजमार्ग पर आ रही हैं, क्योंकि ये हरित क्षेत्र (ग्रीन फिल्ड) के बीच से तैयार किए गए हैं, इस वजह से चालकों को ऐसी तकनीकी परेशानियों का सामना करना पड़ा रहा है। ब्लैक स्पाट को चिहिन्त होने की प्रक्रिया पूर्ण होते ही राजमार्ग पर सामने आने वाले ऐसे स्थानों (ब्लैक स्पाट) को सूचीबद्ध किया जाएगा ताकि जैसे ही किसी भी राज्य में ऐसी तकनीकी दिक्कत सामने आने वाली हो तो चालक को चेतावनी दी जा सके। इस चेतावनियों की मदद से चालकों का जानकारी नहीं होने के कारण अचानक होने वाले हादसों में भी कमी लाई जा सकेगी।
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इस कार्य के लिए दूर संचार विभाग (डीओटी) और भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राइ) की मदद ली जा रही है। इसके अतिरिक्त मंत्रालय ने ऐसे स्थानों की पहचान के लिए स्वतंत्र जांच (थर्ड पार्टी आडिट) के प्रावधान को भी लागू कर दिया है।
एक ई- डीआर रपट भी देश भर के स्तर पर तैयार की जा रही है, जिसके आधार पर सबसे अधिक दुर्घटना वाले क्षेत्रों को चिहिन्त कर दिया है। इस आंकड़े का प्रयोग मंत्रालय की ओर से हादसों वाले क्षेत्र के अध्ययन के लिए किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त मोटर वाहन अधिनियम 1988 के प्रावधानों का प्रयोग करके कुछ जगहों पर मार्ग की तकनीकी गड़बड़ियों को भी ठीक करके इन हादसों में कम लाने की पहल की गई है।
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इनमें मार्ग पर संकेतक लगाना, क्रैश ब्रेरियर की मदद से रफ्तार कम करना और ब्लैक स्पाट आने से पहले ही चालक के लिए पूर्व सूचना देने के लिए बोर्ड लगाना आदि भी शामिल है। मंत्रालय के मुताबिक शुरूआती रपट में जाने जानकारियां सामने आई हैं, करीब 1750 किलोमीटर लंबे राजमार्ग पर करीब 424 स्थलों को चिहिन्त किया गया है।
इन चिहिन्त स्थानों की जानकारियां संबंधित मंत्रालयों को भी साझा की गई है। मंत्रालय की ओर से ट्राइ को यह भी सिफारिश की गई कि वह मानचित्र पर चिहिन्त किए गए स्थानों एसएमएस सेवा के माध्यम से प्रचारित करे। इनमें ब्लैक स्पाट वाले क्षेत्रों के अतिरिक्त उन स्थानों को भी शामिल किया गया है, जहां पर आवारा पशु अक्सर राजमार्ग के दायरे में पाए जाते हैं। मंत्रालय का मानना है कि इन शुरुआती योजनाओं का लाभ भविष्य में तैयार होने वाले आर्थिक गलियारों और भारत माला परियोजना के तहत विकसित किए जा रहे नए राजमार्ग पर भी मिलेगा। देश में राजमार्ग का क्षेत्र मार्च 2019 में 132499 किलोमीटर था, जो कि अब बढ़कर 146560 किलोमीटर तक हो गया है।
