भारतीय महिलाएं आज किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। आमतौर पर औरतों को हमारे यहां कमजोर समझा जाता है। उन्हें चूल्हे-चौके तक का काम संभालने वाली माना जाता है। मगर वे इस बात को गलत साबित कर रही हैं। भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना में शामिल होकर वे अपने हुनर, साहस और पराक्रम का भली-भातिं परिचय दे रही हैं। मसलन किसी महिला ने अकेले फाइटर जेट उड़ाकर देश-दुनिया को दिखाया, तो कोई आला दर्जे की शार्प शूटर हैं। आइए मिलते हैं देश की ऐसी ही छह महिलाओं से जिन्होंने सेना में जाकर इतिहास रच डाला।

पुनीता अरोड़ाः पहली महिला बनीं, जिन्हें इंडियन आर्म्ड फोर्सेज में दूसरी सबसे बड़ी रैंक (लेफ्टिनेंट जनरल) मिली। वह इसके अलावा भारतीय नौसेना में 16 जून 2005 को पहली महिला वाइस एडमिरल बनीं। अरोड़ा जब आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज में थीं, तब वह अपने बैच की टॉपर बनी थीं।

पद्मवती बंदोपाध्यायः वर्ष 2002 में वह भारतीय वायु सेना की पहली महिला एयर मार्शल बनीं। यही नहीं, देश की तीनों सेनाओं में वह थ्री स्टार रैंक पाने वाली वह दूसरी महिला हैं। वह आंध्र प्रदेश के तिरुपति की हैं। लेकिन बाद में वह परिवार के साथ दिल्ली आ गई थीं।

दिव्या अजीथ कुमारः 18 सितंबर 2010 में वह पहली महिला कैडेट बनीं, जिन्हें ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकैडमी (ओटीए) ने सोर्ड ऑफ ऑनर (तलवार दे कर) से नवाजा। दिव्या बाद में कैप्टन बनीं और 2015 में गणतंत्र दिवस की परेड में सीआपीएफ टुकड़ी का नेतृत्व करने वाली वह पहली महिला हैं।

अव्नी चतुर्वेदीः मध्य प्रदेश के रीवा शहर की अव्नी 19 फरवरी 2018 को पहली भारतीय महिला बनीं, जिन्होंने अकेले ही फाइटर विमान उड़ा कर दिखाया। गुजरात के जामनगर में उन्होंने पहली सोलो ट्रेनिंग में मिग-21 बाइसन को उड़ाया था।

शांति तिग्गाः भारतीय सेना में तिग्गा जब जवान के रूप में शामिल हुई थीं, तब वह दो बच्चों की मां थीं। बंदूकें चलाने में माहिर थीं। वह मार्क्समैन (आला दर्जे की शॉर्पशूटर) की सबसे ऊंची रैंक से नवाजी गईं। फिजिकल टेस्ट के दौरान उन्होंने सभी पुरुष साथियों को पछाड़ दिया था।

गुंजन सक्सेनाः आईएएफ के इतिहास में उन्हें करगिल गर्ल के रूप में जाना जाता है। कलगिल युद्ध के दौरान वह पहली महिला थीं, जिन्हें वहां महिला हेलीकॉप्टर पायलट के रूप में तैनात किया गया था।