Maulana Mahmood Madani Controversial Statement: जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना महमूद मदनी ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा, “दुख की बात है कि पिछले कुछ सालों में खासकर बाबरी मस्जिद और तीन तलाक जैसे मामलों में आए फैसलों के बाद ये राय बन रही है कि अदालतें हुकूमत के दबाव में काम कर रही हैं। मौजूदा वक्त में वर्शिप एक्ट को नजअंदाज करते हुए ज्ञानवापी और मथुरा के मामलों की सुनवाई हो रही है। सुप्रीम कोर्ट उस वक्त तक ही सुप्रीम कहलाने का हक रखता है कि जब तक कि वो संविधान पर अमल कर रहा है।”

महमूद मदनी ने कहा, “इस्लाम और मुसलमानों के दुश्मनों ने जिहाद जैसी इस्लाम की पवित्र अवधारणा को दुर्व्यवहार, अव्यवस्था और हिंसा से जुड़े शब्दों में बदल दिया है। लव जिहाद, लैंड जिहाद, तालीम जिहाद और थूक जिहाद जैसे जुमले इस्तेमाल करके मुसलमानों को गहरी ठेस पहुंचती है और उनके धर्म का अपमान होता है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार और मीडिया में जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग भी ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करने में कोई शर्म महसूस नहीं करते। न ही उन्हें पूरे समुदाय को ठेस पहुंचाने की परवाह है। ये तो पुराने दौर से चला आ रहा है। कहीं पर कोई आतंकवादी घटना हो जाती है तो उसको जिहाद बता दिया जाता है। मुसलमानों के ऊपर गलत आरोप लगाए जाते हैं। जब-जब जुल्म होगा तब-तब जिहाद होगा।”

एसआईआर चलाया हुआ है- मदनी

मौलाना महमूद मदनी ने कहा, “एसआईआर भी चलाया हुआ है और यह एक बहुत ही अहम मामला है। अगर हम इस पर नजर रखेंगे तो हम निराशा से बच सकते हैं। मायूसी कौम के लिए जहर है और जिंदा कौम हो तो कहना ही क्या। देश के 60 प्रतिशत लोग चुप बैठे हुए हैं।”

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विशेष समुदाय को निशाना बनाया जा रहा- मौलाना मदनी

जमीयत उलमा-ए-हिंद की नेशनल गवर्निंग मीटिंग में मौलाना महमूद मदनी ने कहा, “देश की वर्तमान स्थिति अत्यंत संवेदनशील और चिंताजनक है। दुख की बात है कि यह कहना होगा कि एक विशेष समुदाय को जबरन निशाना बनाया जा रहा है, जबकि अन्य समुदायों को कानूनी रूप से शक्तिहीन, सामाजिक रूप से अलग-थलग और आर्थिक रूप से अपमानित किया जा रहा है। उनके धर्म, पहचान और अस्तित्व को कमजोर करने के लिए मॉब लिंचिंग, बुलडोजर कार्रवाई, वक्फ संपत्तियों की जब्ती और धार्मिक मदरसों और सुधारों के खिलाफ नकारात्मक अभियान सहित व्यवस्थित और संगठित प्रयास किए जा रहे हैं।”

बीजेपी ने बोला हमला

बीजेपी सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में महमूद मदनी के बयान की आलोचना की है। उन्होंने कहा, “एक बैठक में, जिस तरह से जमीयत-ए-उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना महमूद मदनी ने भोपाल में कहा कि जहां भी किसी भी तरह का दमन हो, वहां ‘जिहाद’ छेड़ा जाना चाहिए, वह न केवल भड़काऊ है बल्कि प्रकृति में विभाजनकारी है। मुझे लगता है कि यह शब्द बहुत गलत है। हमने लोगों को जिहाद के नाम पर आतंक फैलाते देखा है, न केवल भारत में बल्कि दुनिया भर में।”

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