अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) अभी से सक्रिय नजर आ रहे हैं। चुनाव के मद्देनजर दोनों ही संगठनों ने अपनी तीन सबसे बड़ी चुनौतियों की पहचान की है। साथ ही उन्होंने जड़ से निपटाने के लिए योजना भी बनाई है, ताकि चुनाव के परिणाम पर उनका कोई असर न पड़ सके। बीजेपी और आरएसएस की तीन प्रमुख चुनौतियों में- अपनी दलित विरोधी छवि खत्म करना, कृषि और किसानों की पस्त हालत को दुरुस्त करना और विपक्षी दलों की दिन-प्रतिदिन फलती-फूलती एकता शामिल हैं।

पार्टी और संघ के कुछ शीर्ष नेताओं ने इन चुनौतियों को सोमवार (18 जून) को एक बैठक की, जिसमें इन चुनौतियों से लोहा लेने के मसले पर संयुक्त रूप से रणनीति बनी। सूत्रों का कहना है कि हरियाणा के सूरजकुंड में इसे लेकर पांच दिवसीय कार्यक्रम हुआ था, जहां देश भर में बीजेपी के सचिवों को वरिष्ठ नेताओं ने संबोधित किया। 14 जून को आयोजित कार्यक्रम का मकसद 2019 के आम चुनाव और उससे पहले राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में होने विधानसभा चुनाव के लिए रणनीति तय करना था।

पार्टी के अंदर के लोगों का कहना है कि नेताओं ने माना है कि पार्टी की छवि बीते कुछ समय में दलित विरोधी के रूप में उभरी है। वहीं, नेताओं ने यह भी स्वीकारा है कि विपक्ष के अलावा वामपंथी दल भी तेजी से बीजेपी के खिलाफ लामबंद हुआ है। एक बीजेपी नेता ने बताया कि वे जमीनी स्तर पर अभियान चलाएंगे और लोगों के बीच फैली यह गलतफहमी दूर करेंगे कि बीजेपी दलित विरोधी है।

भीमा कोरेगांव मामले को लेकर उन्होंने कहा कि बीजेपी और आरएसएस की छवि इस मुद्दे को लेकर भी खराब की गई। आगे कृषि को लेकर वह बोले, “यह भी गंभीर चुनौती है। यह बाजार के डायनैमिक्स से जुड़ी है, लिहाजा इसमें सरकार ज्यादा कुछ नहीं कर सकती। फिलहाल हम कुछ रणनीतियों पर काम कर रहे हैं। उम्मीद है कि वे काम करेंगी।”

बीजेपी के खिलाफ हो रहे विपक्षी दल भी पार्टी के लिए संकट के बादलों से कम नहीं हैं। पार्टी नेताओं ने इस संबंध में एक विस्तृत विश्लेषण किया है, जहां पर बीजेपी के खिलाफ विपक्ष तेजी से एकजुट हुआ है। हालांकि, पार्टी नेताओं ने इस बारे में रणनीति तो नहीं बताई, मगर इतना जरूर बताया कि वे उन भ्रष्ट लोगों को जरूर बेनकाब करेंगे, जिन्होंने खुद को बचाने के लिए बीजेपी पर आरोप मढ़े।