संसद में आने वाले माननीयों को बंदरों से खतरा है। यह चिंता लोकसभा सचिवालय को भी है। यही वजह है कि संसद में आने वाले सांसदों व अधिकारियों के लिए विशेष हिदायत जारी की गई है ताकि उन्हें संसद परिसर के आसपास के बंदरों के आंतक से बचाया जा सके। हिदायतों में साफ कहा गया है कि बचाव के लिए किसी भी बंदर की आंखों से आंख न मिलाएं। माना जा रहा है कि इन हिदायतों से संसद परिसर के आसपास बंदरों की वजह से होने वाली दुर्घटनाओं को कम किया जा सकेगा। जानकारी के मुताबिक संसद परिसर के आसपास बड़ी तादात में बंदर है। इन बदरों के निशाने पर संसद परिसर में आने वाले लोग हैं। इनसे बचने के लिए अब तक परिसर के आसपास लंगूर की मदद ली जाती थी। लेकिन इस अदालत की रोक के बाद लोकसभा परिसर में चुनौती और बढ़ गई है। हालांकि जानकार बताते हैं कि इस स्थिति में बंदरों से बचाव के लिए एक विशेष व्यक्ति की भी मदद ली जाती है, जो लंगूरों की आवाज निकालने का माहिर है। दिल्ली विधानसभा में भी सत्र के दौरान ऐसे ही व्यक्ति की मदद ली जाती है।
इसकी आवाज से बंदर परिसर के अंदर नहीं आते। इस व्यक्ति को वेतन भी विधानसभा की तरफ से दिया जाता है। लोकसभा द्वारा जारी की गई हिदायतों में कहा गया है कि अगर किसी भी जगह पर बंदर मादा व उसका बच्चा है तो उसके सामने से नहीं जाएं। इसके अलावा ऐसी स्थिति आती है कि बंदर किसी पर हमला कर रहा है तो उसे अनदेखा कर दें। इसके अतिरिक्त आप वाहन या दुपहिया वाहन में हैं और आपका पीछा बंदर कर रहे हैं तो उस स्थिति में रुके नहीं। अगर आपके घर व आसपास में बंदर हैं तो उन्हें दूर रखने के लिए छड़ी का प्रयोग करें।
