लोकसभा चुनाव 2019 में अब कुछ महीने ही शेष हैं। ऐसे में केंद्र में सत्तारूढ़ बीजेपी की सक्रियता बढ़ गई है। आम चुनावों को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार ने नीति आयोग से अगले पांच वर्षों के लिए प्लान का ब्लूप्रिंट तैयार करवाया है। इसमें नरेंद्र मोदी की अगुआई में बीजेपी की सत्ता में वापसी होने पर किए जाने वाले काम का ब्यौरा दिया गया है। मोदी सरकार ने इंडिया @75 नाम से वादों की लिस्ट तैयार करवाई है। इसमें अगले पांच वर्षों में सभी को पक्का मकान, पेयजल का कनेक्शन, शौचालय और 24 घंटे बिजली मुहैया कराने की बात कही गई है। इसके अलावा कुशल कामगारों की हिस्सेदारी को मौजूदा 5.4 फीसद से बढ़ाकर 15 फीसद करने और फ्रेट कॉरीडोर और आंतरिक जल परिवहन से माल ढुलाई को दोगुना करने का भी वादा किया गया है। ब्लूप्रिंट में नेशनल हाईवे का दोगुना विस्तार और रेलवे के लिए अलग नियामक संस्था बनाने की भी बात कही गई है। मोदी सरकार ने इस अवधि में भारतीय अर्थव्यवस्था को 4 ट्रिलियन डॉलर (चार लाख करोड़ डॉलर) तक पहुंचाने का भी वादा किया है। भारतीय अर्थव्यवस्था फिलहाल 2.7 ट्रिलियन डॉलर की है। बता दें कि 15 अगस्त, 2022 को भारत की आजादी के 75 वर्ष पूरे हो जाएंगे।
कृषि क्षेत्र पर विशेष ध्यान: मोदी सरकार ने अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर कई तरह के वादे किए हैं। नीति आयोग की ओर से जारी ब्लूप्रिंट में वर्ष 2018-23 के बीच अर्थव्यवस्था की रफ्तार को 8 फीसद तक रखने की बात कही गई है। ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में भारत को टॉप 50 में शामिल करने का भी लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों और किसानों की हालात को सुधारने का भी वादा किया गया है। मोदी सरकार का वादा है कि सत्ता में वापसी पर कृषि तकनीक को आधुनिक कर उत्पादकता बढ़ाने, फसलों में विविधताएं लाने के साथ ही मॉडल एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस एंड लाइवस्टॉक मार्केटिंग एक्ट लाया जाएगा। इसके अलावा एसेंशियल कॉमोडिटीज एक्ट को संशोधित करने और निर्यात से जुड़ी नीति को और दुरुस्त करने का भी वादा किया गया है। नीति आयोग की ओर से जारी दस्तावेज में ग्रामीण स्तार पर खरीद केंद्र खोलने का भी वादा किया गया है। साथ ही एग्रीकल्चर वैल्यू चैन के लिए मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का भी वादा किया गया है।
वर्ष 2014 में किए गए कई वादे अभी भी अधूरे: वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान नरेंद्र मोदी ने देश की जनता से कई तरह के वादे किए थे। सत्ता में आने के साढ़े चार साल बाद भी वे अधूरे हैं। भाजपा के घोषणापत्र में एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केट कमेटी एक्ट, 2003 में संशोधन करने और किसानों को लागत मूल्य का 50 फीसद तक लाभ दिलाने का वादा किया गया था। लेकिन, सरकार के साढ़े चार साल से ज्यादा का वक्त होने के बाद भी अभी तक इस पर अमल नहीं हो सका है। किसानों की आय भी दोगुनी करने का वादा किया गया था, लेकिन कृषि से जुड़े लोगों की समस्या जस की तस बनी हुई है। बीजेपी ने वर्ष 2014 में सत्ता में आने पर भ्रष्टाचार से निपटने के लिए लोकपाल गठित करने का वादा किया था, लेकिन इस पर अभी तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। इसके अलावा प्रशासनिक सुधार की दिशा में भी कुछ खास नहीं किया जा सका है। ब्लैक मनी के मोर्चे पर किए गए वादे भी पूरे नहीं हो सके हैं। महिलाओं को संसद में 33 फीसद तक आरक्षण देने का भी वादा किया गया था, लेकिन इस पर भी पहल नहीं हुई है। नरेंद्र मोदी ने सत्ता में आने पर हर साल दो करोड़ लोगों को रोजगार देने की बात कही थी, लेकिन इस मोर्चे पर मोदी सरकार लगातार कठघरे में रही है।
