Karur Stampede Case: करूर भगदड़ मामले में अभिनेता और टीवीके प्रमुख विजय से सोमवार को सीबीआई ने छह घंटे तक पूछताछ की। सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में विजय को पूछताछ के बाद अपनी कार से बाहर निकलते हुए देखा गया। विजय सोमवार सुबह करीब 10:29 बजे नई दिल्ली स्थित CBI हेडकॉर्टर पहुंचे थे।
अभिनेता विजय सीबीआई कार्यालय के पास मौजूद प्रशंसकों, शुभचिंतकों और पैपराज़ी की ओर बढ़े। भूरे रंग की कमीज़ और काली पैंट पहने हुए, उन्होंने मुस्कुराते हुए उनका अभिवादन किया और कुछ देर के लिए हाथ हिलाया। फिर वे अपनी कार की ओर वापस चले गए, जबकि उनकी सुरक्षा टीम उनके साथ खड़ी थी।
समाचार एजेंसी PTI ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि विजय सुबह करीब 10:20 बजे राजधानी के लोधी रोड स्थित एजेंसी मुख्यालय में लग्जरी एसयूवी गाड़ियों के काफिले में पहुंचे। वे शाम करीब 5 बजे वहां से रवाना हुए। विजय से इससे पहले 12 जनवरी को सीबीआई मुख्यालय में छह घंटे तक पूछताछ की गई थी। उन्हें 13 जनवरी को दोबारा आने के लिए कहा गया था, लेकिन पोंगल के कारण अभिनेता ने दूसरी तारीख मांगी।
विजय से पूछताछ क्यों की गई?
अधिकारियों ने बताया कि विजय से दिनभर एक उप अधीक्षक के नेतृत्व में एजेंसी के भ्रष्टाचार-विरोधी विंग के अधिकारियों की एक टीम ने पूछताछ की। उन्होंने बताया कि रैली के बारे में निर्णय लेने, देरी के कारणों, भाषण जारी रखने, मौजूदा अराजकता की जानकारी, भीड़ की संख्या और भीड़ के कुप्रबंधन से संबंधित कई सवाल उनसे पूछे गए।
करूर भगदड़ मामले के बारे में सब कुछ
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आरोप पत्र में व्यक्तियों को भूमिका सौंपने का निर्णय अभिनेता, उनकी पार्टी के वरिष्ठ राजनीतिक अधिकारियों और रैली को मंजूरी देने और प्रबंधन की प्रक्रिया में शामिल पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारियों के बयानों के गहन विश्लेषण के बाद ही लिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्रीय एजेंसी ने SIT से यह मामला अपने हाथ में ले लिया था और तमिलनाडु के करूर में 27 सितंबर, 2025 को हुई भगदड़ से संबंधित सबूत जुटा रही है, जिसमें 41 लोगों की मौत हो गई थी और 60 से अधिक लोग घायल हो गए थे। पिछले साल अक्टूबर में, सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई निदेशक को जांच का जिम्मा संभालने के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया था और एजेंसी की जांच की निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश अजय रस्तोगी की अध्यक्षता में एक निगरानी समिति का भी गठन किया था।
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जस्टिस जेके माहेश्वरी और एनवी अंजारी की पीठ ने कहा था कि भगदड़ ने पूरे देश के नागरिकों के मन पर गहरी छाप छोड़ी है। अदालत ने कहा था कि इसका नागरिकों के जीवन पर व्यापक प्रभाव पड़ा है और अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के मौलिक अधिकारों को लागू करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
पीठ ने कहा कि आपराधिक न्याय प्रणाली में जांच प्रक्रिया के प्रति आम जनता का विश्वास और भरोसा बहाल किया जाना चाहिए, और ऐसा विश्वास जगाने का एक तरीका यह सुनिश्चित करना है कि वर्तमान मामले में जांच पूरी तरह से निष्पक्ष, स्वतंत्र और पूर्वाग्रह रहित हो।
