भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती के अवसर पर तेलंगाना जागृति की संस्थापक के. कविता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। पत्र में के.कविता ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को सम्मान देने के लिए अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का नाम बदलकर ‘आजाद हिंद’ करने की मांग की है। बता दें, के. कविता तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री केसीआर की बेटी हैं।

के. कविता ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य आजाद हिंद की ऐतिहासिक विरासत का सम्मान करना है। जिसने 1943 में इन द्वीपों को ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन से मुक्त होने वाला पहला भारतीय क्षेत्र घोषित किया था।

प्रधानमंत्री कार्यालय को लिखे अपने पत्र में के. कविता ने तर्क दिया कि यद्यपि हाल के वर्षों में अलग-अलग द्वीपों का नाम बदला गया है (रॉस, नील और हैवेलॉक का नाम 2018 में बदला गया था), फिर भी सामूहिक द्वीपसमूह अभी भी औपनिवेशिक युग के दौरान थोपे गए नामों को धारण करता है।

उनके पत्र में केंद्र सरकार से नाम परिवर्तन को प्रभावी बनाने के लिए संवैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को शुरू करने का आग्रह किया गया। इस कदम के समर्थकों का तर्क है कि आज़ाद हिंद केवल एक प्रतीकात्मक उपाधि नहीं है, बल्कि नेताजी के नेतृत्व में भारत द्वारा ग्रहण की गई संप्रभुता की पहली सांस का प्रमाण है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पूरे केंद्र शासित प्रदेश का नाम बदलने से भारत का भूगोल नेताजी के औपनिवेशिक अवशेषों से मुक्त एक संप्रभु राष्ट्र के दृष्टिकोण के अनुरूप हो जाएगा।

NDTV से बात करते हुए कविता ने कहा कि आज नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती है। वे ही थे जो देश से बाहर गए और अपनी कूटनीतिक कुशलता से जापान से समर्थन मांगा। उन्होंने बलपूर्वक अंग्रेजों से संपूर्ण अंडमान और निकोबार क्षेत्र छीन लिया।

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कविता ने कहा कि उन्होंने इसका नाम ‘आज़ाद हिंद’ रखा और 1947 से बहुत पहले ही यहां हमारा राष्ट्रीय ध्वज फहराया था। यह एक राष्ट्रीय स्मृति है। इसे बहुत पहले ही सम्मानित किया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मैं प्रधानमंत्री को पत्र लिख रही हूं। भाजपा ने कई नाम बदले हैं। मैं सभी से सहमत नहीं हूँ, लेकिन नेताजी एक ऐसी शख्सियत हैं, एक ऐसी ऊर्जा हैं। अंडमान और निकोबार का नाम अंग्रेजों ने रखा था, हमने नहीं। इसलिए इसका नाम ‘आज़ाद हिंद’ होना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि ऐसा कदम आजाद हिंद फौज को एक महत्वपूर्ण श्रद्धांजलि होगी और भारत के युवाओं के लिए एक “शाश्वत प्रकाशस्तंभ” के रूप में कार्य करेगा, जो आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता संग्राम में किए गए बलिदानों की याद दिलाएगा।

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