जेएनयू (जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय) राजद्रोह मामले में दिल्ली पुलिस ने विवि के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार समेत कई के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। सोमवार (14 जनवरी, 2019) को पटियाला हाउस कोर्ट में पुलिस एक भारी बक्से में कागजात लेकर पहुंची। 1200 पन्नों की चार्जशीट भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज हुई है, कन्हैया के अलावा उनके सहयोगी उमर खालिद, अनिर्बान भट्टाचार्य, आकिब हुसैन, मुजीब हुसैन, मुनीब हुसैन, उमर गुल, राइया रसूल और बशील भट समेत कुछ और लोगों के नाम हैं।

समाचार एजेंसी भाषा के मुताबिक, पुलिस सूत्रों ने बताया कि आरोपपत्र की कॉलम संख्या 12 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के नेता डी राजा की पुत्री अपराजिता, जेएनयूएसयू की तत्कालीन उपाध्यक्ष शहला राशिद, राम नागा, आशुतोष कुमार और बनोज्योत्सना लाहिरी सहित कम से कम 36 अन्य लोगों के नाम हैं, क्योंकि इन लोगों के खिलाफ सबूत अपर्याप्त हैं।

जेएनयू में 2016 में देश विरोधी नारेबाजी हुई थी। न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, इस मामले में चार्जशीट आईपीसी की धारा 124ए, 323, 465, 471, 143, 149, 147, 120B के तहत दर्ज हुई है। कोर्ट मंगलवार (15 जनवरी) को इस पर विचार करेगा। देखें, कैसे बक्से में दस्तावेज लाई पुलिसः

कन्हैया ने इस बारे में कहा, “अगर सच में चार्जशीट दाखिल हुई है तो मैं पुलिस और मोदी जी को शुक्रिया कहना चाहूंगा। तीन साल बाद चुनाव से कुछ रोज पहले चार्जशीट दाखिल होना, यह दर्शाता है कि यह घटना राजनीति से प्रेरित है। फिर भी मुझे देश की न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।”

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, चार्ज शीट फाइल हो चुकी है, जिसमें 10 नाम कोर्ट को भेजे गए हैं। हमने ट्रायल शुरू करने की गुजारिश की है, जबकि 36 लोगों के नाम उस सूची में हैं, जिनके खिलाफ फाइलों में पर्याप्त सबूत नहीं मिले हैं।

बता दें कि कन्हैया व उनके साथियों के खिलाफ दाखिल कराई गई यह चार्जशीट उस एफआईआर पर आधारित है, जो कि जेएनयू परिसर में नौ फरवरी 2016 को आयोजित एक कार्यक्रम को लेकर दर्ज हुई थी। एफआईआर के मुताबिक, उस दिन संसद हमले के दोषी अफजल गुरु को फांसी देने के विरोध पर कथित रूप से देश-विरोधी नारेबाजी हुई थी। ऐसा तब हुआ था, जब इससे पहले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की शिकायत पर प्रशासनिक विभाग ने कार्यक्रम को लेकर अनुमति देने से इन्कार कर दिया था।

कन्हैया, उमर और अनिर्बान पर तब इस कार्यक्रम का आयोजन कराने के आरोप में गिरफ्तार भी किए गए थे। हालांकि, बाद में तीनों को जमानत भी मिल गई थी, जबकि शुरू में वसंत कुंज (उत्तरी) पुलिस थाने में 11 फरवरी 2016 को आईपीसी की 124-ए (राजद्रोह) के तहत मामला दर्ज हुआ था। बाद में यह मामला दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल को सौंप दिया गया था।