उत्तर प्रदेश में रायबरेली जिले के बछरावां रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार को देहरादून-वाराणसी जनता एक्सप्रेस का इंजन और दो कोच पटरी से उतरने से कम से कम 38 यात्रियों की मौत हो गई और 150 लोग घायल हो गए। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने बताया कि संभवत: ब्रेक फेल होने की वजह से इंजन सिग्नल पार कर गया, जिससे इंजन और दो कोच पटरी से उतर गए।

बछरावां प्रदेश की राजधानी लखनऊ से लगभग 50 किलोमीटर दूर है। सबसे अधिक मौतें जनरल डिब्बे में हुर्इं। दूसरा डिब्बा गार्ड का था, जो संभवत: खाली था। अगर यह डिब्बा खाली नहीं होता तो मृतकों की संख्या और बढ़ सकती थी। विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्री मनोज कुमार पांडेय ने घटना स्थल पर पहुंच कर राहत कार्यों का जायजा लिया।

रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने हादसे के कारण का पता लगाने के लिए उत्तरी सर्किल रेल सुरक्षा आयुक्त की जांच का आदेश दिया है। प्रभु ने मृतकों के परिजनों के लिए दो-दो लाख रुपए, गंभीर रूप से घायल यात्रियों के लिए 50,000-50,000 रुपए और साधारण रूप से घायल हुए यात्रियों के लिए 20,000-20,000 रुपए की अनुग्रह राशि की घोषणा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रेन हादसे में लोगों के मारे जाने पर दुख प्रकट किया और रेल मंत्री से यह तय करने को कहा कि मौके पर तेजी से मदद कार्य पहुंचे।

प्रतापगढ़ मुख्यालय के ड्राइवर पीएन मिश्रा जनता एक्सप्रेस को लखनऊ स्टेशन से लेकर रायबरेली के लिए चले। उनके मुताबिक, उस समय ट्रेन का ब्रेक ठीक काम कर रहा था। लेकिन कनकहा स्टेशन पर उसे आभास हुआ कि ट्रेन का ब्रेक काम नहीं कर रहा है। उसने इसकी सूचना गार्ड को दी और अन्य अधिकारियों से भी संपर्क किया। इसी बीच बछरावां स्टेशन करीब आ गया। बछरावां के तकरीबन आठ किमी आगे कुंदनगंज स्टेशन है। यहां पर इलाबाद से लखनऊ जाने वाली गंगा-गोमती एक्सप्रेस खड़ी हुई थी। इसी स्टेशन पर जनता एक्सप्रेस और गंगा-गोमती एक्सप्रेस की क्रासिंग होनी थी। ब्रेक फेल होने की सूचना पर बछरावां के स्टेशन मास्टर ने यह क्रासिंग बछरावां कराने का फैसला किया और गंगा-गोमती एक्सप्रेस को बछरावां की मेन लाइन पर रोक लिया। इसी बीच आउटर पर पहुंची जनता एक्सप्रेस को सैन्डहम लाइन (लूप लाइन) पर डाल दिया। जबकि ड्राइवर जनता एक्सप्रेस को मेन लाइन पर ले जाना चाहता था। यहां लूप लाइन पर ड्राइवर ने इमरजेंसी ब्रेक लेकर ट्रेन को रोकने की कोशिश की। लेकिन ट्रेन स्टापर को तोड़ते हुए आगे निकल गई।

इस दुर्घटना में इंजन के पीछे की दो जनरल बोगियां एक-दूसरे के ऊपर चढ़ गर्इं। इनके पीछे लगा स्लीपर कोच एस-8 भी इन दोनों बोगियों से टकरा गया। इंजन के ठीक पीछे वाली जनरल बोगी सिकुड़कर आधी रह गई और उसके पीछे की जनरल बोगी आगे वाली बोगी को चीरते हुए उसके अंदर घुस गई। ट्रेन रुकते ही चारों ओर चीख-पुकार मच उठी। लोग दोनों बोगियों में फंसे हुए थे जिन्हें निकालने का रास्ता दिखाई नहीं दे रहा था। चारों ओर खून बिखरा था। कुछ ने तुरंत ही दम तोड़ दिया तो कुछ ने दबे-दबे दम तोड़ दिया। हादसे के बाद वास्तविक राहत कार्य तकरीबन ढाई घंटे बाद शुरू हो सका। तकरीबन 20 स्थानीय युवाओं की टोली ने तत्काल राहत कार्य शुरू कर दिया। ये युवक बुरी तरह क्षतिग्रस्त डिब्बों से लोगों को निकाल नहीं पा रहे थे। भारी-भरकम लोहे की चादरों के बीच फंसे लोगों को निकालना आसान नहीं था।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दुर्घटना पर दु:ख प्रकट करते हुए मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपए और घायलों को 50-50 हजार रुपए की आर्थिक मदद देने की घोषणा की है। दुर्घटना सुबह लगभग नौ बजकर 15 मिनट की है। जैसे ही दुर्घटना की खबर फैली, आसपास के गांव वाले राहत और बचाव कार्यों में जुट गए। राहत और बचाव कार्य में देरी के लिए स्थानीय लोगों ने रेलवे और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की। दुर्घटना की वजह से लखनऊ-वाराणसी खंड पर ट्रेनों का परिचालन बाधित हो गया। परिचालन बहाल करने के लिए रेलवे की टीमें जुटी हुई हैं।

घायल यात्रियों को रायबरेली के जिला अस्पताल ले जाया गया। लखनऊ और रायबरेली से राहत टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं और यात्रियों को प्राथमिक चिकित्सा व पेयजल मुहैया कराया। बोगियों को अलग करने के लिए क्रेन की मदद ली गई। चश्मदीदों ने बताया कि कई एंबुलेंस मौके पर पहुंचीं और घायल यात्रियों को लेकर अस्पताल रवाना हुर्इं। यातायात के भारी दबाव और वीआइपी आवाजाही की वजह से लखनऊ-रायबरेली मार्ग पर जाम लग गया, जिसके बाद पुलिस ने वाहनों को दूसरे मार्गों की ओर मोड़ दिया। ट्रेन में कथक नर्तक शीतला प्रसाद मिश्रा अपने परिजनों के साथ सीतापुर से कार्यक्रम संपन्न कर लौट रहे थे। वे जनता एक्सप्रेस की जनरल बोगी में सवार थे। उनके साथ आ रहे उनके भतीजे अनिल मिश्रा रायबरेली अस्पताल में भर्ती हैं। उनके अनुसार उनके चाचा और दो अन्य परिजनों की हादसे में मृत्यु होने की आशंका है। अनिल मिश्रा ने बताया कि हादसे से पहले वे बाथरूम में घुस रहे थे उसी समय दो-तीन बार धड़ाम-धड़ाम की आवाज हुई और वे वहीं गिर पड़े। गिरने के बाद उनके ऊपर एक सीट टूटकर गिरी और पूरे डिब्बे में धुआं भर गया। उनका कहना है कि संभवत: उसी सीट के नीचे दबने के कारण उनकी जान बच गई।

राहत और बचाव कार्यों का जायजा लेने घटनास्थल पर पहुंचे प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन ने बताया कि 27 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि चार अन्य ने लखनऊ के ट्रामा सेंटर में दम तोड़ दिया।

लखनऊ और रायबरेली से बचाव दल पहुंच गए हैं। बोगियों को हटाने के लिए क्रेन की मदद ली जा रही है। क्षतिग्रस्त डिब्बों को काटने के लिए कटर का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि उनमें फंसे यात्रियों को बाहर निकाला जा सके। लखनऊ में घायल यात्रियों के इलाज के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। जिलाधिकारी राजशेखर ने कहा-50 बिस्तर पूरी तरह तैयार हैं। लगभग 23 मरीजों का यहां इलाज किया जा रहा है जबकि 15 डाक्टरों और 30 नर्सों व पैरामेडिकल स्टाफ की टीमें घायलों के इलाज में लगी हैं। जिन घायलों की स्थिति में सुधार है और जो मामूली रूप से घायल हैं, उन्हें राम मनोहर लोहिया, बलरामपुर और सिविल अस्पतालों में भर्ती किया जाएगा ताकि गंभीर रूप से घायल यात्रियों का इलाज केजीएमयू में किया जा सके।

उधर, लखनऊ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी एसएनएस यादव ने बताया कि डाक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की 24 टीमें बछरावां रवाना कर दी गई हैं। उन्होंने कहा कि लखनऊ में 150 से अधिक बिस्तर तैयार हैं ताकि घायलों के इलाज में कोई बाधा नहीं आने पाए। दुर्घटना में घायल हुए लोगों के इलाज के लिए चिकित्सा टीमें तैयार हैं। उन्होंने कहा कि घायलों और एंबुलेंस को तय जगह तक पहुंचाने के लिए हर अस्पताल में एक पैरा मेडिकल स्टाफ की तैनाती की गई है।

रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने रेलवे सुरक्षा आयुक्त (उत्तरी सर्किल) द्वारा दुर्घटना की जांच के आदेश दिए हैं ताकि ट्रेन के पटरी से उतरने की असल वजह का पता लगाया जा सके। रेलवे प्रवक्ता ने कहा कि प्रथम दृष्टया लगता है कि सिग्नल पार करने की वजह से ट्रेन पटरी से उतरी, लेकिन दुर्घटना की वास्तविक वजह का पता जांच के बाद ही लग पाएगा। दुर्घटनास्थल रायबरेली से 30 किलोमीटर दूर है। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एके मित्तल सहित वरिष्ठ रेलवे अधिकारी और रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा राहत और बचाव कार्यों की निगरानी के लिए पहुंच चुके हैं।

रेलवे ने बछरावां, देहरादून, लखनऊ, वाराणसी, प्रतापगढ़, रायबरेली, हरिद्वार और बरेली में कई हेल्पलाइन नंबर शुरू किए हैं ताकि जनता एक्सप्रेस पर सवार यात्रियों के बारे में जानकारी प्रदान की जा सके। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने दुर्घटना पर गहरा दु:ख प्रकट किया है। रायबरेली सोनिया का निर्वाचन क्षेत्र है। मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए सोनिया ने उम्मीद जताई कि सरकार पर्याप्त मुआवजे की व्यवस्था कर रही है और घायलों का भलीभांति इलाज किया जा रहा है।

परिजनों की सूचना के लिए संपर्क नंबर

रेलवे की ओर से जारी इन नंबरों पर प्रभावित परिजन पूछताछ कर सकते हैं।
बछरावां : 09794845621
देहरादून : 0135-2624002
लखनऊ : 09794830973
वाराणसी : 9542-2503841
प्रतापगढ़ : 0534-2223830
रायबरेली : 0535-2211224
हरिद्वार : 0134-226477
बरेली : 0581-2258161