जम्मू कश्मीर में 2019 में इससे पिछले साल की तुलना में पथराव की घटनाओं में बढ़ोतरी दर्ज की गई। पिछले साल इस तरह की 1999 घटनाएं दर्ज की गईं थीं, जिनमें से 1193 मामले केंद्र द्वारा पांच अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को समाप्त करने तथा राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांटने की घोषणा के बाद सामने आए।

सरकारी आंकड़े बताते हैं कि पथराव की सर्वाधिक घटनाएं पिछले साल अगस्त में सामने आईं, जिनकी संख्या 658 थी। मई में ऐसी 257, सितंबर में 248, अप्रैल में 224, अक्तूबर में 203, फरवरी में 103 और नवंबर में 84 घटनाएं सामने आईं। जम्मू कश्मीर में 2018 में पत्थर फेंकने की 1458 और 2017 में 1412 घटनाएं दर्ज की गईं। हालांकि 2019 में पथराव की घटनाओं की संख्या 2016 की बनिस्बत कम थी। उस साल ऐसे 2653 मामले दर्ज किए गए थे। उसी साल हिज्बुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद पूरे कश्मीर में हिंसक प्रदर्शन हुए थे। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार जम्मू कश्मीर में पांच अगस्त को अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के बाद से 6000 लोगों को गिरफ्तार किया गया। फिलहाल 500 से 600 लोग हिरासत में हैं और बाकी को छोड़ दिया है।

सामाजिक कार्यकर्ता रोहित चौधरी की आरटीआइ अर्जी के जवाब में गृह मंत्रालय ने जो आंकड़े दिए उनके मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में 2019 में नवंबर के आखिर तक पथराव की 1996 घटनाएं सामने आई थीं। इनमें से 1193 मामले सिर्फ अगस्त के बाद चार महीनों में दर्ज किए गए। पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने पहले कहा था कि 2016 की तुलना में 2019 में कुल मिलाकर हिंसा का स्तर आठ फीसद कम हो गया है और ऐसा स्थिति से सर्वश्रेष्ठ तरीके से निपटने के कारण हुआ है।