Jammu-Kashmir News: जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को सिंधु जल संधि को निलंबित करने का समर्थन करते हुए कहा कि पुराना समझौता जम्मू और कश्मीर के हितों के लिए हानिकारक था। अमृतसर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, उन्होंने संधि के प्रति अपने लंबे समय से चले आ रहे विरोध को दोहराया और कहा कि इसके निलंबन से क्षेत्र को अपने जल संसाधनों का इस्तेमाल करने की इजाजत मिलेगी।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा, “मैं पहले दिन से ही इसके खिलाफ रहा हूं। सिंधु जल संधि ने हमें बहुत नुकसान पहुंचाया है। यह अच्छा हुआ कि संधि को निलंबित कर दिया गया है।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस कदम के बाद अब ऐसे कदम उठाए जाने चाहिए जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि जम्मू और कश्मीर अपने लोगों के लिए क्षेत्र के जल संसाधनों का प्रभावी ढंग से इस्तेमाल कर सके।

हमने केंद्र को दो परियोजनाएं सौंपी हैं- सीएम

सीएम अब्दुल्ला ने कहा, “अब मैं चाहता हूं कि ऐसे उपाय किए जाएं जिससे हम उस पानी का उपयोग अपने लिए कर सकें। हमने केंद्र को दो परियोजनाएं सौंपी हैं, जिनसे हमें लाभ होने की उम्मीद है। इनमें से एक झेलम नेविगेशन बैरेज है, जिसे तुलबुल नेविगेशन बैरेज के नाम से जाना जाता है।”

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उन्होंने इस प्रोजेक्ट के फायदों पर प्रकाश डालते हुए कहा, “वुलर में जलस्तर बढ़ेगा और झेलम नदी में भी पानी का स्तर बढ़ेगा। बिजली उत्पादन बढ़ेगा और झेलम का इस्तेमाल नेविगेशन के लिए किया जा सकेगा।” उन्होंने आगे कहा कि वे इन परियोजनाओं के संबंध में केंद्र के साथ लगातार संपर्क में हैं।

टूरिस्टों की संख्या पर पड़ा असर- उमर अब्दुल्ला

मुख्यमंत्री ने पिछले एक वर्ष में जम्मू और कश्मीर में पर्यटन क्षेत्र के सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में भी विस्तार से बात की। उन्होंने पिछले साल को बहुत मुश्किल बताया और कहा कि जैसे ही पर्यटन पटरी पर आने लगा था, दिल्ली बम विस्फोट ने एक और झटका दिया और टूरिस्टों की संख्या पर असर डाला। उन्होंने कहा, “हम इन राज्यों में पर्यटन को पुनर्जीवित करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। मैं यह नहीं कह सकता कि हम सफल हो गए हैं, लेकिन बर्फबारी शुरू होने के बाद से ऐसा लग रहा है कि पर्यटन धीरे-धीरे पुनर्जीवित हो रहा है।”

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