सिंगापुर माडल की तर्ज पर अब भारत भी एक निश्चित सीमा तक निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों को 20 साल का निवासी का दर्जा देगा। सरकार ने अधिक विदेशी निवेश आकर्षित करने के मकसद से नई नीति को मंजूरी दे दी है। इस नीति के तहत देश में कम से कम दस करोड़ रुपए तक का निवेश लाने वाले विदेशी निवेशकों  को अब निवासी का दर्जा दिया जा सकता है। इससे वे देश में मकान खरीद सकेंगे और उनके लिए वीजा व्यवस्था उदार की जाएगी। उनके परिवार के सदस्यों को नौकरी का अवसर और अन्य सहूलियतें भी दी जाएंगी। हालांकि, यह योजना पाकिस्तान और चीन के नागरिकों को उपलब्ध नहीं होगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में बुधवार को इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके तहत 18 माह के दौरान 10 करोड़ रुपए तक और तीन साल में 25 करोड़ रुपए तक का विदेशी निवेश लाने वाले विदेशी निवेशक को 10 साल का निवासी परमिट दिया जाएगा। इस निवासी दर्जे को 10 और साल के लिए बढ़ाया जा सकेगा। ऐसे निवेशकों को यहां एक आवासीय संपत्ति खरीदने की अनुमति होगी। ऐसे निवेशक की पत्नी और बच्चे यहां नौकरी कर सकेंगे और पढ़ाई कर सकेंगे। केंद्रीय मंत्रिमंडल की इस बैठक के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि यदि भारत में आप एक न्यूनतम स्तर का निवेश करते हैं तो आपको वीजा उपलब्ध होगा। साथ ही संपत्ति खरीदने का अधिकार मिलेगा, परिवार के सदस्यों को नौकरी का अवसर मिलेगा। इस बारे में मंत्रिमंडल ने विस्तृत नीति को मंजूरी दी है। इस योजना से भारत में विदेशी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और मेक इन इंडिया कार्यक्रम को सुगमता से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। योजना के तहत वीजा मैनुअल में उचित प्रावधान शामिल किए जाएंगे जिससे विदेशी निवेशक को स्थाई निवासी का दर्जा प्रदान किया जा सके।

आधिकारिक बयान में कहा गया है कि बहु प्रवेश के साथ स्थायी निवासी का दर्जा दस साल के लिए दिया जाएगा। यदि ऐसे व्यक्ति के खिलाफ किसी तरह का प्रतिकूल नोटिस नहीं होता है, तो इसकी अवधि दस साल और बढ़ाई जा सकती है। यह योजना सिर्फ उन विदेशी निवेशकों के लिए होगी जो तय पात्रता शर्तें पूरी करेंगे। योजना का लाभ लेने के लिए विदेशी निवेशक को 18 महीने में कम से कम दस करोड़ रुपए का निवेश या 36 महीनों में 25 करोड़ रुपए का निवेश करना होगा। इसके अलावा विदेशी निवेश से प्रत्येक वित्त वर्ष में 20 निवासी भारतीयों को रोजगार मिलना चाहिए।