कीट तेजी से खत्म हो रहे हैं। कीट ना बचे तो जीवन भी नहीं होगा। वर्ष 1960 के दशक में एक बच्चे के रूप में डेविड वागनर अपने परिवार के खेतों में कांच का एक जार लेकर आसमान से गिरते जुगनुओं को जमा करते थे। वागनर अब कीटविज्ञानी बन चुके हैं। कनेक्टिकट यूनिवर्सिटी में काम करने वाले वागनर कहते हैं, कीट वह भोजन है जिससे सारी चिड़िया बनती हैं, सारी मछलियां बनती हैं। वे पूरी पृथ्वी पर ताजे पानी, और धरती के पूरे जलवायु तंत्र को जोड़े रखते हैं।
वैज्ञानिक दुनिया भर में कीटों के गायब होने की इस घटना को ‘इंसेक्ट एपोकैलिप्स’ कहते हैं। इंसानी गतिविधियों से पृथ्वी लगातार बदल रही है। इसके नतीजे में धरती पर से कीट हर साल दो फीसद की दर से गायब हो रहे हैं। जंगलों की कटाई, कीटनाशकों का इस्तेमाल, कृत्रिम रोशनी, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन के बीच ये कीट जीवन के लिए कड़ा संघर्ष कर रहे हैं। इनके साथ ही वो सारी फसलें, फूल और दूसरे जानवर भी अस्तित्व का संकट देख रहे हैं जिन पर इन कीटों का जीवन निर्भर है।
कीट आर्थोपाड फाइलम या शाखा के अंतर्गत आते हैं। जीव समुदाय में ऐसी कुल 40 शाखाएं हैं। अब तक पहचाने गए 15 लाख से ज्यादा कीट पृथ्वी पर पाए जाने वाले कुल कीटों के दो तिहाई हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी 10 लाख से ज्यादा कीटों की पहचान होनी बाकी है। इंटरनेशनल यूनियन फार कंजर्वेशन आफ नेचर’ के मुताबिक यह जीव समुदाय का महज पांच फीसद हैं।
कीट भोजन चक्र में अहम भूमिका निभाते हैं। वे चिड़ियों, सरीसृपों और चमगादड़ जैसे स्तनधारियों का मुख्य भोजन हैं। कुछ जीवों के लिए तो कीट किसी दावत से कम नहीं। शाकाहारी जीव ओरांगउटान को दीमकों को खाने में बहुत मजा आता है। इंसान के भोजन में भी दो सौ से ज्यादा कीट शामिल हैं।
कीट भोजन से ज्यादा भी बहुत कुछ हैं। कीट दुनिया भर की फसलों के 75 फीसद से ज्यादा का परागण करते हैं। इस सेवा की कीमत दुनिया भर के लिए हर साल 577 अरब डालर से भी ज्यादा है। अमेरिका में हर साल कीटों के सेवा की कीमत 2006 में 57 अरब डालर आंकी गई थी। अमेरिका के मवेशी उद्योग में केवल गुबरैले ही हर साल 38 करोड़ डालर के कीमत की सेवा मुहैया कराते हैं। यह काम खाद को तोड़ने और उन्हें मिट्टी में मिलाने का है।
‘बायोलाजिकल कंजर्वेशन जर्नल’ के एक शोध के मुताबिक पिछले 150 सालों में सभी कीटों की पांच से 10 फीसद यानी 250,000 से 500,000 प्रजातियां लुप्त हो चुकी हैं। कीटों का खत्म होना लगातार जारी है। पेन्सिल्वेनिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जानजेन कहते हैं, पृथ्वी हर दशक में नौ फीसद कीटों की आबादी खो रही है। कीटों के खत्म होने के पीछे कोई एक कारण नहीं है। कीटों की आबादी एक साथ कई तरह के खतरे झेल रही है। इनमें आवास का खत्म होना, औद्योगिक खेती से लेकर जलवायु परिवर्तन तक शामिल हैं। सीवेज और उर्वरकों के कारण नाइट्रोजन की अधिकता ने नम जमीनों को मृत क्षेत्र में बदल दिया है।
बीते दो दशकों में इसने उत्तर अमेरिका के करीब 260,000 वर्ग किलोमीटर जंगलों का सफाया कर दिया है। इसी तरह गर्म और नम मौसम के कारण बीमारी फैलाने वाली मच्छरों की दो प्रजातियां एडिस एजिप्टी और एडिस एल्बोपिक्टस का एशिया, उत्तरी अमेरिका और यूरोप में खूब विस्तार हो रहा है। इनके कारण 2080 तक करीब 2.3 अरब लोगों पर डेंगू का खतरा रहेगा।
