देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में दूषित पानी पीने से लोगों को सबसे खतरनाक ‘जीबीएस’ बीमारी होने का चौंका देने वाला मामला सामने आया है। गुलियन-बैरी सिंड्रोम (जीबीएस) गंदे पानी के सेवन से होती है। इसका इलाज काफी महंगा बताया जा रहा है। वहीं, एक व्यक्ति ने दावा किया कि शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से फैले उल्टी-दस्त के प्रकोप में उसके 69 वर्षीय रिश्तेदार की मौत हो गई। इस मामले को मिलाकर स्थानीय लोगों ने उल्टी-दस्त के प्रकोप में अब तक कुल 17 लोगों की मौत का दावा किया है, जबकि प्रशासन ने छह मरीजों की मौत की पुष्टि की है।
हालांकि, महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने दो जनवरी को कहा था कि उन्हें इस प्रकोप में 10 मरीजों की मौत की जानकारी मिली है। स्थानीय निवासी अभिषेक शर्मा ने बताया कि उनके रिश्तेदार ओमप्रकाश शर्मा (69) की एक निजी अस्पताल में डायरिया के इलाज के दौरान रविवार को मौत हो गई। पुलिस आरक्षक पद से सेवानिवृत्त ओमप्रकाश मूलत: धार के रहने वाले थे और अपने एक रिश्तेदार से मिलने इंदौर आए थे। अभिषेक ने दावा किया कि ओमप्रकाश कुछ दिन पहले भागीरथपुरा गए थे और वहां उन्होंने दूषित पानी पिया था। उन्होंने कहा कि ओमप्रकाश में 30 दिसंबर को देर रात डायरिया के लक्षण उभरे थे।
इसके बाद शरीर में पानी की गंभीर कमी के कारण उन्हें स्थानीय अस्पताल की गहन चिकित्सा इकाई (आइसीयू) में भर्ती कराया गया था। हालत और बिगड़ने पर उन्हें जीवनरक्षक तंत्र पर रखा गया था, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। डायरिया के प्रकोप से ओमप्रकाश की मौत के दावे पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी माधव प्रसाद हासानी ने दावा किया कि यह मरीज भागीरथपुरा में 29 दिसंबर को उल्टी-दस्त का प्रकोप शुरू होने से पहले अस्पताल में भर्ती था। उन्होंने कहा कि ओमप्रकाश को पहले से उच्च रक्तचाप और गुर्दे की बीमारियां थीं।
उनकी मौत के बाद उनके बेटे ने मुझसे संपर्क किया है और उन्हें राज्य सरकार की ओर से यथोचित मदद मुहैया कराई जाएगी। मैंने अस्पताल से ओमप्रकाश के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी है। हासानी के मुताबिक उल्टी-दस्त की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग के सघन अभियान के बाद भागीरथपुरा में हालात ‘पूरी तरह नियंत्रण’ में हैं। इस बीच, भागीरथपुरा निवासी पार्वती कोंडला (67) में कथित तौर पर गुलियन-बैरी सिंड्रोम (जीबीएस) जैसे लक्षण मिले हैं। शहर के एक निजी अस्पताल में बेहद गंभीर हालत में भर्ती कोंडला जीवन और मृत्यु के बीच झूल रही हैं।
अस्पताल के एक अधिकारी ने बताया कि कोंडला हमारे अस्पताल से पहले एक अन्य अस्पताल में भर्ती थीं। उस अस्पताल के चिकित्सकों ने जांच रपट के आधार पर मरीज में जीबीएस जैसे लक्षणों की बात कही थी। हालांकि, हमारे अस्पताल में जब मरीज की पूरी जांच की गई, तो पता चला कि वह मस्तिष्क आघात (ब्रेन स्ट्रोक) से भी पीड़ित हैं। तमाम लक्षणों के आधार पर मरीज का उपचार किया जा रहा है।
बहरहाल, प्रशासन ने मीडिया की खबरों का खंडन करते हुए दावा किया है कि भागीरथपुरा में जीबीएस का एक भी मरीज नहीं मिला है। जीबीएस के किसी मरीज के बारे में हमें किसी भी स्थानीय अस्पताल या चिकित्सक ने कोई सूचना नहीं दी है। जीबीएस एक दुर्लभ, लेकिन गंभीर तंत्रिका संबंधी बीमारी है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से अपने ही परिधीय तंत्रिका तंत्र पर हमला करती है। परिधीय तंत्रिका तंत्र में वे तंत्रिकाएं शामिल होती हैं जो व्यक्ति को शरीर के अंगों को महसूस करने और चलने के बारे में संकेत भेजती हैं। जीबीएस में व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है और शरीर के कुछ हिस्से अचानक सुन्न पड़ जाते हैं, मांसपेशियों में कमजोरी आ जाती है और कुछ निगलने या सांस लेने में भी दिक्कत होती है।
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