पाकिस्तान की जेल में छह साल रहने के बाद वतन लौटे हामिद निहाल अंसारी ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से बुधवार को मुलाकात की और अपना दर्द बयां किया। अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार को भारत लौटे 33 वर्षीय अंसारी पाकिस्तान में अपने जीवन के सबसे मुश्किल वक्त के बारे में बात करते हुए भावुक हो गए। अपनी मां और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ आए अंसारी ने मामले पर अटल रहने और इसे पाकिस्तान के समक्ष उठाने के लिए स्वराज और विदेश मंत्रालय का शुक्रिया भी अदा किया। सुषमा स्वराज से मिलते ही वे रो पड़े। इस दौरान हामिद की मां भी वहां मौजूद थीं। उन्होंने सुषमा स्वराज से कहा, “मेरा भारत महान है। मेरी मैडम महान हैं। सब मैडम ने किया है। मेरे बेटे को आप मौत के मुंह से बचाकर लाए।” इस पर सुषमा स्वराज ने कहा, “कभी-कभी बुरा समय होता है।”

वाघा-अटारी सीमा पार कर भारत लौटे मुंबई निवासी अंसारी को पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने 15 दिसंबर, 2015 को सजा सुनाई थी जिसके बाद उन्हें पेशावर केंद्रीय कारागार में रखा गया था। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक भारत ने अंसारी तक राजनयिक पहुंच की मांग के लिए 96 बार ‘नोट वरबल्स’ (राजनयिक तौर पर संवाद) जारी किया। उन्होंने बताया कि अंसारी की रिहाई भारत की तरफ से लगातार बनाए गए दबाव का नतीजा है।

पाकिस्तान ने पेशे से इंजीनियर अंसारी पर भारतीय जासूस होने और देश में अवैध तरीके से प्रवेश करने सहित फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्त होने का आरोप लगाया था। नवंबर 2012 से जब अंसारी रोजगार के सिलसिले में देश छोड़ काबुल के लिए रवाना हुए और फिर उनके ‘लापता’ होने की खबर आई, उनके परिवार के लिए यह कठिन परीक्षा का समय रहा।

कथित रूप से सोशल मीडिया पर हामिद की दोस्ती एक पाकिस्तानी लड़की से हो गई और लड़की की जबरन कराई जा रही शादी रोकने के लिए वह खैबर पख्तूनख्वा के कोहट पहुंचे। 12 नवंबर 2012 को अंसारी ने पाकिस्तान के पेशावर जाने के लिए जलालाबाद में अफगानिस्तान सीमा पार की, जहां पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों ने उन्हें पकड़ लिया। बाद में, एक सैन्य अदालत ने उन्हें तीन साल के लिए जेल भेज दिया। उनकी तीन साल जेल की सजा पूरी होने के बाद भी उन्हें जेल में रखा गया।