भारत सरकार अनजाने में लाइन ऑफ कंट्रोल (LOC) क्रॉस कर जाने वाले भारतीय सैनिक को वापस लाने के लिए कूटनीतिक तरीकों का सहारा लेगी। ऐसा इसलिए है क्योंकि अबतक इंडियन आर्मी के डीजीएमओ (डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन) रणबीर सिंह ही पाकिस्तान के डीजीएमओ से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने चंदू बाबूलाल चव्हाण को छोड़ने की अपील की थी लेकिन पाकिस्तान की तरफ से कोई जवाब नहीं आया। ऐसे में सरकार को लगने लगा है कि अब उसे ही पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय से बातचीत करनी होगी। भारतीय विदेश मंत्रालय अबतक चव्हाण के केस को नहीं देख रहा था। अबतक उसने आर्मी को ही चंदू को वापस लाने की जिम्मेदारी सौंप रखी थी।

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गौरतलब है कि A 37 राष्ट्रीय राइफल के सिपाही चंदू बाबूलाल चौहान जो कि जम्मू कश्मीर के मेंडर सेक्टर में पोस्टिंग पर थे सर्जिकल स्ट्राइक के कुछ घंटों बाद लापता हो गए थे। बाद में पता लगा कि वह अनजाने में बॉर्डर पार करके पाकिस्तान चले गए। पहले तो पाकिस्तान चंदू के उसके पास होने की बात को नकारता रहा लेकिन बाद में उसने चंदू के उसके पास होने की पुष्टि की थी। रक्षा मंत्री मनहोर पर्रिकर ने कहा था कि फिलहाल हालात ठीक नहीं हैं इस वजह से चंदू को वापस लाने में थोड़ा वक्त लग सकता है। चव्हाण के परिवार वाले पहले ही डर जता चुके हैं कि चंदू पर पाकिस्तान द्वारा अत्याचार किया जा रहा होगा। चंदू चव्हाण के भाई भूषण ने कहा, ‘हम लोग इस बात को लेकर परेशान हैं कि वे लोग चंदू पर अत्याचार करेंगे।’ भूषण भी फौजी हैं। वह इस वक्त गुजरात में तैनात हैं। चंदू महाराष्ट्र के धुले गांव का रहने वाले हैं। उनके पकड़े जाने की खबर सुनकर उनकी दादी को ऐसा सदमा लगा कि उनकी मौत हो गई।

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