भारत ने न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी द्वारा दिल्ली दंगों के आरोप में जेल में बद एक्टिविस्ट उमर खालिद को लिखे पत्र की कड़ी निंदा की है। भारत ने इस बात पर जोर दिया है कि चुने हुए नेताओं को दूसरे लोकतांत्रिक देशों में न्यायपालिका की स्वतंत्रता का सम्मान करना चाहिए।
प्रेस ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इस तरह का दखल गलत है।
भारतीय मूल के ममदानी ने पिछले महीने अमेरिका में उनसे मिलने पहुंचे जेएनूय के पूर्व छात्र उमर खालिद के माता-पिता को हाथों से लिखा एक नोट सौंपा था। इस नोट में ममदानी ने उमर के साथ एकजुटता जाहिर की थी।
‘उमर खालिद हम आपके…’, न्यूयॉर्क के मुस्लिम मेयर ममदानी का दिल्ली दंगे के आरोपी को पत्र
रणधीर जायसवाल ने कहा, “हम जन प्रतिनिधियों से उम्मीद करते हैं कि वे अन्य लोकतांत्रिक देशों में न्यायपालिका की स्वतंत्रता का सम्मान करें।” उन्होंने कहा, “किसी पद पर बैठे लोगों को व्यक्तिगत पूर्वाग्रह जाहिर करना शोभा नहीं देता। बेहतर होगा कि वह ऐसी टिप्पणियां करने के बजाय उन्हें दी गई जिम्मेदारियों पर फोकस करें।”
पांच साल से जेल में हैं उमर खालिद
दिल्ली पुलिस ने फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिकता पंजीकरण (एनआरसी) के खिलाफ विरोध-प्रदर्शनों के दौरान भड़के दंगों की साजिश के सिलसिले में उमर को सितंबर 2020 में गिरफ्तार कर लिया था। तब से उमर खालिद को जमानत नहीं मिल सकी है। इन दंगों में 53 लोगों की मौत हो गई थी और 700 से अधिक घायल हुए थे।
उमर के खिलाफ यूएपीए और आईपीसी की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस का दावा है कि ये दंगे केंद्र सरकार को बदनाम करने की साजिश का हिस्सा थे।
सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी थीं जमानत याचिकाएं
5 जनवरी, 2026 को सुनाए गए फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने पाया कि रिकॉर्ड में मौजूद सबूत आपराधिक साजिश में इन दोनों के शामिल होने की ओर इशारा करते हैं। जस्टिस अरविंद कुमार और एनवी अंजारिया की बेंच ने कहा था कि अभियोजन पक्ष ने दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत पेश किए हैं।
