पीएम नरेंद्र मोदी ने जम्‍मू कश्‍मीर के मुद्दे पर शुक्रवार को ऑल पार्टी मीटिंग की। यहां उन्‍होंने कहा कि पाक अधिकृत कश्‍मीर भी जम्‍मू-कश्‍मीर का हिस्‍सा है। पीएम ने कहा कि राष्‍ट्रीय सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। हालांकि, हमनें जम्‍मू-कश्‍मीर के लोगों का भरोसा जीतना होगा। सर्वदलीय बैठक के बाद गृहमंत्री राजनाथ सिंह और वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने मीडियाकर्मियों से बातचीत की। राजनाथ ने कहा, ‘सभी पार्टियों ने अपनी चिंताओं को एकस्‍वर में सामने रखा। पीएम ने कहा कि वक्‍त आ गया है जब पाकिस्‍तान बलूचिस्‍तान और पाक अधिकृत कश्‍मीर के लोगों पर हुई ज्‍यादती पर दुनिया को जवाब दे।’ राजनाथ ने बताया, ‘जम्‍मू कश्‍मीर और यहां के लोगों के विकास के लिए 80 हजार करोड़ रुपए से ज्‍यादा के विकास पैकेज को लेकर केंद्र सरकार ने फैसला किया है।’

वहीं, सर्वदलीय बैठक की जानकारी देते हुए अरुण जेटली ने कहा कि सभी पार्टियां इस बात पर एकराय हैं कि राष्‍ट्रीय सुरक्षा से कोई खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। जेटली ने बताया, ‘सभी पार्टियों की राय थी कि जम्‍मू कश्‍मीर में आम लोग जो समस्‍याएं झेल रहे हैं, उन पर ध्‍यान दिया जाना चाहिए। सिक्‍युरिटी फोर्सेज से कहा गया है कि वे पूरे संयम से पेश आएं। राज्‍य के विभिन्‍न इलाकों में कर्फ्यू में ढील दी गई है।’ वित्‍त मंत्री ने पैलेट गन के इस्‍तेमाल पर कहा, ‘एक एक्‍सपर्ट कमेटी इस मामले को देख रही है। यह एक ऐसा मामला है, जिसमें सिक्‍युरिटी से जुड़े पहलुओं को भी देखना होगा। एक बार एक्‍सपर्ट कमेटी विकल्‍पों के साथ अपनी राय रख देगी, उसके बाद सरकार कोई फैसला करने की स्‍थ‍िति में होगी।’

मोदी ने सभी पार्टियों का कहा शुक्रिया

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने  कहा कि सरकार जम्मू और कश्मीर में सभी वर्ग के लोगों की शिकायतों को संविधान के अनुरूप दूर करने को तैयार है, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि देश की अखंडता के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। मोदी ने कश्मीर पर सर्वदलीय बैठक में पाकिस्तान के समर्थन वाले सीमा पार आतंकवाद को घाटी में अशांति की मूल वजह बताया। बैठक में कश्मीर में भाजपा की गठबंधन सहयोगी पीडीपी और विपक्षी दलों ने भी शिरकत की। चार घंटे तक चली बैठक के दौरान कुछ विपक्षी दलों ने सरकार से कहा कि वह घाटी के कुछ हिस्सों से अफ्सपा हटाने और पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगाने जैसे विश्वास बहाली उपाय तत्काल करे। गत आठ जुलाई को हिज्बुल आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद से कश्मीर में अशांति बनी हुई है।

कश्मीर के हालात पर विचार के लिए बुलाई गई इस महत्वपूर्ण बैठक में यह सुझाव भी दिया गया कि हालात का जायजा लेने के लिए एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल कश्मीर का दौरा करे, लेकिन सरकार ने विपक्षी पार्टियों की मांगों पर कोई वादा नहीं किया। मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि केन्द्र सरकार संविधान के बुनियादी सिद्धांतों के आधार पर स्थायी और शांतिपूर्ण समाधान के लिए वचनबद्ध हैं, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया, ‘हम सभी इस राष्ट्रीय भावना से बंधे हैं कि देश की क्षेत्रीय अखंडता के साथ कोई समझौता नहीं हो सकता।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘हम संविधान के अंतर्गत सभी वर्गों की शिकायतें दूर करने को तैयार हैं।’एक सप्ताह से भी कम समय में यह दूसरा मौका है जब मोदी ने राज्य की जनता की बात की है और वहां के सभी पक्षों के साथ बात करने की इच्छा जताई है। उन्होंने इस मौके पर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और बलूचिस्तान में मानव अधिकारों के उल्लंघन के लिए पाकिस्तान को आड़े हाथों लिया और कहा कि वहां होने वाले अत्याचारों के लिए उसे अन्तरराष्ट्रीय समुदाय को जवाब देना होगा।