ब्यूरोक्रेट से राजनेता बने और जम्मू कश्मीर पीपल्स मूवमेंट के अध्यक्ष शाह फैसल ने गुरुवार (12 सितंबर 2019) को दिल्ली हाई कोर्ट से अपनी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को वापस ले लिया। नजरबंद पूर्व आईएएस अधिकारी से कश्मीर में मुलाकात के बाद उनकी पत्नी ने यह याचिका वापस ली है। बता दें कि एक महीने पहले ही शाह फैसल को पब्लिक सेफ्टी एक्ट (पीएसए) के तहत दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर नजरबंद कर लिया गया था। इसके बाद अपनी नजरबंदी को गैर-कानूनी बताते हुए कुछ दिन बाद शाह ने इसके खिलाफ याचिका दायर की थी।
हालांकि शाह के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर (एलओसी) के केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को वापस नहीं लिया गया है और इस पर हाई कोर्ट में सुनवाई जारी रहेगी। पूर्व आईएस अधिकारी के वकील ने यह जानकारी दी। फैसल की पत्नी ने उच्च न्यायालय को बताया कि उन्होंने हाल ही में फैसल से हिरासत में मुलाकात की थी और उसी दौरान उन्हें याचिका वापस लेने के निर्देश मिले।
फैसल की पत्नी ने इस संबंध में हलफनामा दाखिल किया था जिसके बाद न्यायमूर्ति मनमोहन और न्यायमूर्ति संगीता धींगरा की पीठ ने फैसल को याचिका वापस लेने की अनुमति दी। गौरतलब है कि पूर्व आईएएस अधिकारी की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में कहा गया था उन्हें 14 अगस्त को दिल्ली हवाई अड्डे पर अवैध रूप से हिरासत में ले कर वापस श्रीनगर भेज दिया गया था, जहां उन्हें नजरबंदी में रखा गया है।
बता दें कि शाह फैसल ने जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले आर्टिकल 370 को हटाए जाने की आलोचना की थी। उन्होंने इसे “राज्य में राजनीतिक मर्यादा का हनन” बताया था। शाह फैसल ने कहा था- मैं इसे हमारे इतिहास में एक भयावह मोड़ के रूप में देखता हूं। गौरतलब है कि 2009 में आईएएस टॉप करने वाले पहले कश्मीरी शाह फैसल ने इस साल की शुरुआत में सेवा से इस्तीफा दे दिया और मुख्यधारा की चुनावी राजनीति में शामिल होने के उद्देश्य से J&K पीपुल्स मूवमेंट की स्थापना की।
