निलंबन का बना रिकॉर्ड, भारी गतिरोध और घंटे भर में पास हुए एक तिहाई बिल, कैसा रहेगा 17वीं लोकसभा का प्रदर्शन?
अंतरिम बजट सत्र के साथ ही 17वीं लोकसभा का कार्यकाल खत्म हो गया है। ऐसे में लोकसभा चुनाव की अधिसूचना जल्द ही जारी होने वाली है। यह लोकसभा कई ऐतिहासिक कामों के लिए जानी जाती है। इस कार्यकाल के दौरान रिकॉर्ड सांसदों का निलंबन हुआ है। इतना ही नहीं इस दौरान 1 तिहाई बिल तो महज 1 घंटे में ही पास हो गए थे और उन पर बहस काफी ज्यादा हुई थी।
पहली लोकसभा के दौरान प्रोडक्टिविटी की बात करें तो उस दौरान औसतन 135 दिन संसद चली थी लेकिन 16वीं और 17वीं लोकसभा में यह एवरेज 66 और 55 दिन रहा है। यूपीए 1 और यूपीए दो के दौरान 66 और 71 दिन रहा था। 17वीं लोकसभा के दौरान 15 सत्र बैठक हुई थी। 2019 में एक सार्थक के बात शुरुआत हुई थी, जिसमें 25 बैठकें हुईं थ पिछले सत्र के दौरान यह 37 पहुंच गई थी। 17 वीं लोकसभा के दौरान काम करने के घंटों खासकर विधेयकों पर चर्चा और पारित करने के लिए बिताए गए समय पर गिरावट आई थी। 2019 के बजट सत्र में काम कुल 281 घंटे और विधेयकों पर 125 घंटे खर्च हुए।
इस लोकसभा के 15 सत्रों में से चार में ही विधेयकों पर चर्चा और पारित करने में 35 घंटे से ज्यादा का समय बिताया है। 2023 के बजट सत्र में लोकसभा कानून पर चर्चा करने मं सिर्फ एक ही घंटे का ही समय लगा है। 2019 के बजट सत्र में करीब 35 विधेयक पारित हुए थे जो कि इस अवधि के लिए सबसे अधिक है। इसके अलावा 2023 के बजट सत्र में केवल 6 विधेयक पारित किए गए।
कितने पारित हुए बिल?
17वीं लोकसभा में कुल 221 विधेयक पारित किए गए थे और पिछली लोकसभा में 180 विधेयक पारित हुए थे। हालांकि उनमें से एक तिहाई से ज्यादा बिल एक घंटे से भी कम की बहस में पारित हो गए थे। केवल 16 प्रतिशत विधेयकों आगे की जांच के लिए स्थाई समितियों को भेजा गया था। अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के अलावा इस लोकसभा के ही कार्यकाल में ही तीन तलाश और सीएए जैसा बिल पास हुआ है।
केंद्र और दिल्ली सरकार एक विधेयक को लेकर आपस में भिड़ंत हुई थी, जिसने निर्वाचित सरकार की प्रशासनिक शक्तियों को कम कर दिया और उन्हें केंद्र द्वारा नियुक्त उपराज्यपाल के पास भेज दिया। मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त विधेयक पारित होने को लेकर भी चर्चा में रहा। इसने भारत के मुख्य न्यायाधीश की जगह एक केंद्रीय मंत्री को नियुक्त करके नियुक्ति पैनल की संरचना को बदल दिया।
सांसदों के निलंबन का भी बना रिकॉर्ड
2023 में बजट सत्र के दौरान सदन का कामकाज 96 घंटों तक ठप रहा। इसके अलावा इस पूरे कार्यकाल के दौरान करीब 435 घंटे बर्बाद हुए थे। बता दें कि 17 वीं लोकसभा में सर्वाधिक 115 सांसदों के निलंबन का भी रिकॉर्ड बना है, 100 सांसदों का निलंबन तो 2023 के शीतकालीन सत्र में ही हुआ था। पिछली लोकसभा के दौरान करीब करीब 81 सांसद सस्पेंड किए गए थे। पुराने रिकॉर्ड को देखें तो 1984 से 1989 के बीद सबसे ज्यादा 66 निलंबित हुए थे।
