सरकारी क्षेत्र की कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड में हल्के लड़ाकू विमान तेजस के निर्माण में हो रही देरी के मद्देनजर भारतीय वायुसेना ने बड़ा कदम उठाया है। वायुसेना ने रक्षा मंत्रालय को पत्र लिखा है कि 83 विमानों की आपूर्ति के प्रस्ताव को लेकर एचएएल ने निविदा शर्तें पूरी नहीं की है। वायुसेना ने अपने पत्र में एचएएल के रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) में तीन बड़ी खामियां गिनाते हुए रक्षा मंत्रालय से इस बारे में समुचित कदम उठाने को कहा है। रक्षा मंत्रालय एक प्रवक्ता के मुताबिक, यह सीधे तौर पर सौदा रद्द कराने की सिफारिश है। भारतीय वायुसेना ने अपने पुराने पड़ चुके मिग-21 और मिग-27 विमानों के बेड़े को बदलने के लिए 40 एलसीए जेट विमानों की खरीद का ऑर्डर दिया था। साथ ही 83 मार्क 1ए एलसीए के लिए टेंडर जारी किया था। भारतीय वायुसेना ने एचएएल को दिसंबर 2017 में टेंडर (सिंगल वेंडर टेंडर) जारी किया था। इसके तहत एचएएल ने मार्च 2018 में परियोजना के रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल के तहत तकनीकी और आर्थिक मसविदा वायुसेना को सौंपा। वायुसेना के अधिकारियों के मुताबिक, इस आरएफपी में तीन बड़ी खामियां थीं। सरकारी क्षेत्र की इस कंपनी ने प्रति विमान जो कीमत बताई थी, वह आज की तारीख में महंगा पड़ने लगा है।

एचएएल ने प्रस्ताव सौंपने से 12 महीने की वैधता के आधार पर कीमत का प्रस्ताव दिया। जबकि, नियमानुसार कीमतों के प्रस्ताव की वैधता 18 महीने की होती है। साथ ही, वायुसेना ने जो तकनीकी जरूरतें बताई थी, उसके मुताबिक कोई चर्चा नहीं थी। कुछ महीने पहले वायुसेना के कमांडरों ने तकनीकी हल के साथ दस्तावेज मांगे। एचएएल से दो जवाब मिले, लेकिन वे जरूरतों के मुताबिक नहीं थे। युद्धक विमान को जंग के मोर्चे पर उड़ान लायक स्थिति में आपूर्ति करने की समयसीमा अवधि काफी लंबी बताई गई। 16 जनवरी को एचएएल ने एक और जवाब भेजा, जिसपर टेक्निकल इवैल्यूएशन कमेटी सहमत नहीं हुई। ऐसे में रक्षा खरीद परिषद को इस सौदे के बारे में प्रस्ताव भेजने की योजना अधर में रह गई।

वायुसेना के अधिकारियों के मुताबिक, तेजस विमान कार्यक्रम एक साल से ज्यादा लेट हो चुका है। रक्षा खरीद परिषद ने नवंबर 2016 में ही 50 हजार करोड़ रुपए के सौदे पर मुहर लगा दी थी। अधिकारियों के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय ने इस योजना को लेकर एक साल से ज्यादा समय तक एचएएल के अधिकारियों से बात की, लेकिन रास्ता नहीं निकला। आपूर्ति और भुगतान की शर्तों को लेकर रास्ता नहीं निकल सका।