देश उन वीर जवानों का हमेशा ऋणी रहेगा, जिन्होंने इस मातृभूमि की रक्षा में अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। ऐसे ही वीरों में शुमार किए जाते हैं परमवीर चक्र विजेता सेकेंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल। अरुण खेत्रपाल साल 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में कमाल की बहादुरी का परिचय देते हुए सिर्फ 21 साल की उम्र में शहीद हो गए थे। युद्ध में दिखाए गए उनके अदम्य साहस के लिए अरुण खेत्रपाल सबसे कम उम्र में परमवीर चक्र से सम्मानित होने वाले सैनिक हैं। बता दें कि आज ही के दिन यानि कि 14 अक्टूबर, 1950 को अरुण खेत्रपाल का जन्म हुआ था। अरुण खेत्रपाल का जन्म एक सैनिक परिवार में हुआ और उनके पिता भी सेना में ब्रिगेडियर के पद पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

अरुण खेत्रपाल अपनी स्कूली जीवन से ही काफी होनहार और खेलकूद में आगे रहने वाले छात्र थे। साल 1967 में जून माह में खेत्रपाल ने नेशनल डिफेंस एकेडमी ज्वाइन की और साल 1971 में भारतीय सेना की 17 पूना होर्स स्कवॉड्रन में भर्ती हुए थे। अरुण खेत्रपाल के सेना में भर्ती होने के कुछ समय बाद ही भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध शुरु हो गया। बताया जाता है कि अरुण खेत्रपाल ने खुद उस जंग में भाग लेने के लिए अपने अधिकारियों के सामने इच्छा जाहिर की थी। इस युद्ध में उनकी स्कवॉड्रन का सामना 16 दिसंबर को शंकरगढ़ सेक्टर के बसंतार में पाकिस्तानी सेना से हुआ था। दरअसल अरुण खेत्रपाल की स्कवॉड्रन को बसंतार में नदी पर पुल बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लेकिन पाकिस्तानी सेना इस पुल को तबाह करने के लिए वहां पहुंच गई थी, जिससे दोनों सेनाएं आमने-सामने आ गईं। इस पर अरुण खेत्रपाल ने टैंक से हमला करते हुए पाकिस्तानी सेना के 10 टैंकों को तबाह कर दिया था। हालांकि इसी दौरान अरुण खेत्रपाल वीरगति को प्राप्त हो गए।

अरुण खेत्रपाल की बहादुरी से ना सिर्फ भारतीय सेना बल्कि पाकिस्तानी सेना भी प्रभावित हुए बिना नहीं रह सके थे। युद्ध के कई साल बाद जब अरुण खेत्रपाल के पिता कुछ सैन्य अधिकारियों के साथ पाकिस्तान गए थे, तब पाकिस्तान सेना के ब्रिगेडियर मोहम्मद नासिर ने भी अरुण खेत्रपाल की बहादुरी को सराहा था और कहा था कि अरुण चीते की तरह लड़ा था। मोहम्मद नासिर भी शंकरगढ़ की उस लड़ाई में पाकिस्तान की तरफ से लड़े थे। अपने वीर सपूत को सम्मान देते हुए भारतीय सेना ने अरुण खेत्रपाल के नाम पर एनडीए के परेड ग्राउंड का नामकरण किया है। इसके साथ ही इंडियन मिलिट्री एकेडमी में एक ऑडिटोरियम का नाम भी अरुण खेत्रपाल के नाम पर रखा गया है।