पंजाब के अमन-चैन को भंग करते हुए सरहद पार से आए आतंकवादियों ने सोमवार को गुरदासपुर के दीनानगर कस्बे में बड़े हमले को अंजाम देते हुए एक थाने में घुसकर गोलियां चलाईं जिसमें एक पुलिस अधीक्षक सहित सात लोग मारे गए, वहीं दिनभर चले कमांडो अभियान के बाद सभी तीनों आतंकवादी भी मारे गए। इस हमले के बाद दिल्ली और पाकिस्तान से लगे सभी सरहदी राज्यों में कड़ी चौकसी कर दी गई है।

इस हमले की लोकसभा और सभी राजनीतिक दलों ने कड़ी निंदा की है। केंद्र सरकार ने इस हमले पर एक बार फिर पाकिस्तान को चेताया है, जबकि पंजाब सरकार ने केंद्र से सवाल किया कि अगर आतंकवादी हमले की आशंका से जुड़ी कोई जानकारी थी तो सूबे से जुड़ी सीमा को सील क्यों नहीं किया गया था। गृहमंत्री राजनाथ सिंह इस घटना पर मंगलवार को संसद में बयान देंगे।

गुरदासपुर से मिली खबर के अनुसार, सेना की वर्दी पहने आतंकवादियों ने सोमवार सुबह सड़क किनारे एक ढाबे पर और एक यात्री बस पर हमला किया और बाद में दीनानगर थाने में घुस गए। सूत्रों का कहना है कि आतंकवादी लश्करे-तैयबा या जैशे-मोहम्मद के सदस्य हो सकते हैं। थाने के पास खाली इमारत में छिपे आतंकवादियों के खिलाफ अभियान का नेतृत्व करने वाले पंजाब पुलिस के महानिदेशक सुमेध सिंह सैनी ने बताया कि आतंकवादियों ने सात लोगों – तीन नागरिकों, पंजाब प्रांतीय सेवा के अधिकारी पुलिस अधीक्षक (खुफिया) बलजीत सिंह और तीन होमगार्डों की हत्या कर दी।

उन्होंने बताया कि 15 लोग गोलीबारी में घायल हो गए जिनमें से तीन की हालत गंभीर है। आतंकवादी सफेद रंग की एक मारुति 800 कार छीनकर उसमें सवार हो गए और बाद में उसे छोड़ गए। करीब 12 घंटे तक पुलिस और स्पेशल वीपन्स एंड टैक्टिक्स टीम (स्वात) के कमांडो के साथ गोलीबारी में सभी तीनों आतंकवादी मारे गए। सैनी के अनुसार उनके पास से चीन निर्मित हथियार और जीपीएस उपकरण मिले हैं।

हमलावरों के बारे में कोई अधिकृत बयान नहीं है। लेकिन केंद्रीय सुरक्षा एजंसियों को मिली जानकारी के अनुसार संदेह है कि वे जम्मू और पठानकोट के बीच बिना बाड़ की सीमा के जरिए या जम्मू जिले के चक हीरा के रास्ते पाकिस्तान से भारत में चोरी-छिपे घुस आए थे। आठ वर्षों बाद यह पंजाब में हुआ पहला बड़ा आतंकवादी हमला है।

इससे पहले 20 मार्च को जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में जैशे-मोहम्मद के फिदायीन हमलावर सेना की वर्दी में एक थाने में घुस आए थे और तीन सुरक्षाकर्मियों समेत छह लोग इस हमले में मारे गए थे। पंजाब पुलिस के एक शीर्ष अधिकारी ने गोलीबारी समाप्त होने के बाद कहा, ‘अभियान समाप्त हो गया है।’ हमलों के बाद कुछ समय तक धरपकड़ अभियान जारी रहा और इमारत को खाली कराया गया।

पंजाब पुलिस के आइजी (काउंटर इंटेलीजेंस) गौरव यादव के मुताबिक, एसपी बलजीत सिंह ने गोलीबारी में गोली लगने के बाद दम तोड़ दिया। पुलिस ने बताया कि गुरदासपुर के सिविल अस्पताल में लाए गए घायलों में से गंभीर रूप से घायल सात लोगों को अमृतसर भेज दिया गया। इन सभी की उम्र 15-55 साल के बीच है। गुरदासपुर के उपायुक्त अभिनव त्रिखा ने बताया कि अभियान में तीन आतंकवादी मारे गए।

डीजीपी सैनी ने संवाददाताओं से कहा, ‘आतंकवादियों के पास अत्याधुनिक हथियार थे। हमने उनके पास से ‘चीन निर्मित’ ग्रेनेड बरामद किए।’ सैनी के मुताबिक, उनके पास से एके-47 बंदूकें और हैंड ग्रेनेड मिले। उन्होंने कहा कि हमले की साजिश पहले से रची गई थी क्योंकि उनका हमला एक विशेष दिशा में लक्षित था। सैनी ने पुलिस और आतंकवादियों के बीच हुई गोलीबारी पर कहा कि दोनों ओर से भारी गोलीबारी हुई।

इस आतंकी हमले की खबर मिलने पर केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को नीमच (मप्र) में कहा कि भारत पाकिस्तान के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध चाहता है, लेकिन अगर राष्ट्रीय स्वाभिमान को चुनौती दी गई तो मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। राजनाथ ने कहा कि वे यह नहीं समझ पा रहे हैं कि भारत द्वारा पाकिस्तान के साथ ‘अच्छे संबंध’ चाहने के बावजूद सीमा पार से आतंकी घटनाएं लगातार क्यों हो रही हैं।

उन्होंने कहा, ‘मेरी समझ में यह नहीं आता कि जब हम अपने पड़ोसी (पाकिस्तान) के साथ अच्छे संबंध चाहते हैं तो सीमा पार से आतंकी घटनाएं बार-बार क्यों हो रही हैं । मैं अपने पड़ोसी को बताना चाहता हूं कि हम शांति चाहते हैं, लेकिन अपने राष्ट्रीय स्वाभिमान की कीमत पर नहीं ।’

बाद में राजनाथ सिंह ने पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से स्थिति पर बातचीत की। उन्होंने शीर्ष अधिकारियों के साथ सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की। सिंह ने कहा कि वे इस मुद्दे पर मंगलवार को संसद में बयान देंगे।

आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा करते हुए मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने कहा कि आतंकवाद एक राष्ट्रीय समस्या है। बादल ने कहा, आतंकवाद एक राष्ट्रीय समस्या है। यह राज्य की समस्या नहीं है। इससे राष्ट्रीय नीतियों के मुताबिक निपटना होगा। बादल ने सीमा को सील करने की मांग की। बादल ने कहा कि अगर पंजाब में आतंकी हमले की आशंका से जुड़ी कोई जानकारी केंद्र को थी तो सीमा को सील कर दिया जाना चाहिए था।

बादल ने कहा, आतंकी पंजाब से नहीं आए थे। वे सीमापार से आए थे। खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए बादल ने कहा कि जैसे ही उन्हें इस ‘कायराना कृत्य’ की जानकारी मिली, उन्होंने तत्काल ही पुलिस महानिदेशक एसएस सैनी से कहा कि वे मौके पर पहुंचें और |परेशन को समन्वित करें। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद राज्य भर में रेड अलर्ट घोषित कर दिया गया है।

दीनानगर कस्बा पाकिस्तान की सीमा से लगा है और गुरदासपुर जिले में पड़ता है। यह गुरदासपुर और पठानकोट शहरों के बीच में है और राजधानी चंडीगढ़ से करीब 260 किलोमीटर दूर स्थित है। राज्य ने 1980 के दशक के बाद से कई वर्षों तक सिख चरमपंथ का सामना किया। पिछला आतंकवादी हमला लुधियाना में 14 अक्तूबर 2007 को हुआ था जिसमें एक सिनेमाघर में शक्तिशाली बम विस्फोट में सात लोगों की मौत हो गई थी और 30 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे।

स्वात बल के एक अधिकारी ने कहा, ‘मिशन सफल रहा। कठिनाइयां हमेशा होती हैं लेकिन हमारे प्रशिक्षण की मदद से हम हालात से निपटने में इन कठिनाइयों से सफलतापूर्वक उबर गए।’ सुरक्षा एजंसियों ने स्वतंत्रता दिवस से महज तीन सप्ताह पहले हुए आतंकवादी हमले के मद्देनजर पूरे देश में और खासतौर पर पंजाब और पड़ोसी राज्यों में और केंद्रशासित प्रदेश चंडीगढ़ में भी निगरानी बढ़ा दी है। एक संबंधित घटनाक्रम में अमृतसर-पठानकोट रेलवे लाइन पर पांच बम मिले और इस मार्ग पर ट्रेन सेवाएं रद्द कर दी गईं। अधिकारियों ने बताया कि घटना को देखते हुए शहर में आज स्कूल, कॉलेज और अन्य संस्थानों को बंद कर दिया गया। मृतकोंं में तीन की पहचान गुलाम रसूल, आशा रानी और अमरजीत सिंह के रूप में हुई है।

एक शहरी जतिंदर कुमार का घर दीनानगर थाने से महज 500 मीटर की दूरी पर है। उन्होंने कहा, हमले के बारे में जानकर लोग हैरान और भयभीत हैं। पंजाब स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत जतिंदर कुमार ने कहा, ‘हम थाने में सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच हो रही गोलीबारी की आवाज साफ सुन सकते थे।

इस बीच गृह मंत्रालय का मानना है कि पंजाब के गुरदासपुर में हमला करने वाले आतंकवादी जम्मू और पठानकोट के बीच खुली सीमा अथवा जम्मू जिले के चक हीरा के रास्ते चोरी-छिपे पाकिस्तान की सीमा से भारत में दाखिल हुए होंगे। केंद्रीय खुफिया एजंसियों को इस तरह से आतंकवादियों के भारतीय सीमा में घुसने की गुप्त सूचना मिली थी।

(एजंसी)