हरित रेटिंग प्रणाली ‘जीआरआइएचए’ के प्रमुख ने कहा है कि भारत में दो फीसद से कम हरित (पर्यावरण अनुकूल) इमारतें हैं। हालांकि इनकी संख्या में बढ़ोतरी करने का बड़ा अवसर है क्योंकि देश का करीब 60 फीसद आधारभूत ढांचा अगले 20 वर्ष में बनने वाला है। चिंताजनक प्रदूषण स्तर का सामना कर रहे दिल्ली जैसे शहरों में हरित इमारतों का महत्व बताते हुए ‘ग्रीन रेटिंग फॉर इंटीग्रेटिड हबिटाट एसेसमेंट (जीआरआईएचए) काउंसिल’ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजय सेठ ने कहा कि हरित इमारतें बाहर के प्रदूषण से लोगों का सामना होने की संभावनाओं को कम कर सकती हैं।उन्होंने बताया कि हरित इमारतें डिजायन के मामले में ज्यादा स्वास्थ्यकर होती हैं लेकिन अंदर आने वाली हवा बाहर होती है और कुछ हद तक आप क्षति को हरित इमारत के जरिए कम कर सकते हैं। हरित इमारत पर्यावरण अनुकूल ढांचे बनाने व प्रक्रियाओं को अपनाने की परंपरा है। ‘जीआरआईएचए’ एक रेटिंग प्रणाली है। जो कुछ खास राष्ट्रीय स्तर के स्वीकार्य मानकों पर उनकी इमारत के प्रदर्शन को आंकने में लोगों की मदद करती है।

भारत में हरित इमारतों को बढ़ावा देने के लिए ऊर्जा व संसाधन संस्थान और नवीन व अक्षय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा जीआरआइएचए परिषद को संयुक्त रूप से स्थापित किया गया है। भारत में दो फीसद से भी कम इमारतें पर्यावरण अनुकूल हैं लेकिन सेठ ने कहा कि इस संख्या में बढ़ोतरी करने के लिए बड़ा अवसर है क्योंकि देश में अगले 20 वर्ष में करीब 60 फीसद आधारभूत ढांचे बनाए जाने हैं। बीते एक वर्ष में इस परिषद ने दिल्ली में 50 इमारतों को हरित होने का प्रमाणपत्र दिया है। परिषद ने पूरे देश में कुल 80 इमारतों का हरित होना प्रमाणित किया है।