हिंदी साहित्य के इतिहास में गोस्वामी तुलसीदास को न सिर्फ विशिष्ट स्थान प्राप्त है बल्कि उनके माध्यम से हिंदी में काव्य अनुशासन और प्रभाव की लंबी परंपरा है।

नाभादास ने उन्हें जहां कलिकाल का वाल्मीकि कहा है तो वहीं प्रसिद्ध विद्वान स्मिथ ने उन्हें मुगलकाल का सबसे महान व्यक्ति कहा है। इसी तरह ग्रियर्सन उन्हें बुद्ध के बाद सबसे बड़ा लोकनायक मानते हैं। हिंदी साहित्य का सबसे प्रामाणिक इतिहास लिखने वाले आचार्य रामचंद्र शुक्ल तुलसी के बारे में कहते हैं, ‘इनकी वाणी की पहुंच मनुष्य के सारे भावों-व्यवहारों तक है।

एक ओर तो वह व्यक्तिगत साधना के मार्ग में विरागपूर्ण शुद्ध भगवदभजन का उपदेश करती है दूसरी ओर लोक पक्ष में आकर पारिवारिक और सामाजिक कर्तव्यों का सौंदर्य दिखाकर मुग्ध करती है।’ आचार्य शुक्ल यहां तक कहते हैं कि यह एक कवि ही हिंदी को प्रौढ़ साहित्यिक भाषा सिद्ध करने के लिए काफी है।