Ghulam Nabi Azad Resignation: इस वक्त कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक बस एक ही बात की चर्चा रही है वो है गुलाम नबी आजाद का कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देना। उनको लेकर देश के सियासी हलकों में अटलों का दौर शुरू हो गया है। माना जा रहा है कि आजाद भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो सकते हैं। इन कयासों के बीच कांग्रेस पार्टी ने गुलाम नबी आजाद पर विश्वासघात करने का आरोप लगाया। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने उनके चरित्र पर सवाल उठाया।

उन्होंने कहा, “एक व्यक्ति जिसे कांग्रेस नेतृत्व ने सबसे ज्यादा सम्मान दिया है, उसने अपने शातिर व्यक्तिगत हमलों से धोखा दिया है जो उसके असली चरित्र को उजागर करता है। जीएनए के डीएनए को संशोधित किया गया है।” वहीं, गुलाम नबी आजाद ने राहुल गांधी की तीखी आलोचना किया, तो पार्टी के बड़े नेताओं ने प्रतिक्रिया दिया। कई लोगों ने उनकी मंशा पर सवाल उठाया है।

कांग्रेस राष्ट्रव्यापी आंदोलन की कर रही तैयारी

इससे पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेस में कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ताओं ने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वरिष्ठ नेता ने ऐसे समय में इस तरह से इस्तीफा दे दिया, जब पार्टी सत्तारूढ़ बीजेपी के खिलाफ बड़े पैमाने पर राष्ट्रव्यापी आंदोलन की तैयारी कर रही है।” कांग्रेस ने कहा, “कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी और पूरी पार्टी संगठन बीजेपी के खिलाफ महंगाई, बेरोजगारी के मुद्दे को लेकर सियासी लड़ाई में शामिल है।”

“जी-23 पार्टी में सुधार के लिए बना था न कि विद्रोह के लिए”

पार्टी ने कहा, जबकि नई दिल्ली में हल्ला बोल रैली और कन्याकुमारी से भारत जोड़ी यात्रा के शुभारंभ के लिए अंतिम तैयारी की जा रही है।” दरअसल, गुलाम नबी आजाद पार्टी नेतृत्व और संगठन में बदलाव का आह्वान करने वाले जी-23 असंतुष्ट समूह का हिस्सा थे। कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित भी जी-23 का हिस्सा है, लेकिन उन्होंने आजाद के इस्तीफे पर निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा, “जी-23 पार्टी में सुधार के लिए बना था न कि विद्रोह के लिए।”

अशोक गहलोत का आजाद पर तीखा हमला

वहीं, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा, “गुलाम नबी आजाद पिछले 42 सालों में कांग्रेस पार्टी में कई पदों पर थे और किसी को भी उनसे इस तरह के पत्र की उम्मीद नहीं थी।” उन्होंने कहा, “सोनिया गांधी चेकअप के लिए अमेरिका में हैं और आप एक पत्र जारी कर रहे हैं, ये अच्छा नहीं है।” उन्होंने आजाद पर तीखा हमला बोलते हुआ कहा, “संजय गांधी के समय में आजाद खुद एक चापलूस थे।”