केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) ने उत्तर प्रदेश में अवैध खनन घोटाले के संबंध में दो नए मामले दर्ज किए हैं, जिनमें चार आइएएस अधिकारियों और पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति के नाम आरोपियों के तौर पर शामिल किए गए हैं। सीबीआइ ने प्राथमिकियां दर्ज करने के बाद आइएएस अधिकारी अभय सिंह, विवेक के परिसरों समेत 12 स्थानों पर छापे मारे। आइएएस अभय सिंह के आवास से 47 लाख एवं एक वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी देवी शरण उपाध्याय के आवास से करीब 10 लाख रुपए की करंसी बरामद की। उपाध्याय अभी आजमगढ़ के सीडीओ के रूप में तैनात हैं। सीबीआइ ने विवेक के परिसरों से संपत्तियों से संबंधित कुछ दस्तावेज भी जब्त किए हैं। बुलंदशहर, लखनऊ, फतेहपुर, आजमगढ़, इलाहाबाद, नोएडा, गोरखपुर, देवरिया समेत 12 स्थानों पर छापे मारे गए।
सीबीआइ के द्वारा दर्ज ताजा प्राथमिकियों में समाजवादी पार्टी की तत्कालीन सरकार में मंत्री रहे प्रजापति, तत्कालीन प्रधान सचिव जिवेश नंदन, विशेष सचिव संतोष कुमार, जिले के तत्कालीन मजिस्ट्रेट अभय और विवेक के नाम हैं। प्रजापति की संलिप्तता वाले मामले में एजंसी ने आरोप लगाया कि बालू खनन के लिए अपने पट्टे के नवीकरण के लिए लाभार्थियों शिव सिंह और सुखराज ने मंत्री के प्रभाव का इस्तेमाल किया।
सीबीआइ के आरोप है कि नंदन कुमार और फतेहपुर के तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट अभय ने 2014 में सुखराज के मामले में पट्टे के नवीकरण के लिए मंत्री के साथ कथित तौर पर साजिश की। इन पट्टों का राज्य सरकार की ई-निविदा नीति का कथित तौर पर उल्लंघन कर नवीकरण कराया गया था। दूसरे मामले में एजंसी ने आरोप लगाया कि देवरिया में डीएम के रूप में तैनात रहने के दौरान विवेक ने शारदा यादव के नवीकरण करने की अनुमति दी। अभय सिंह अभी बुलंदशहर के जिला मजिस्ट्रेट हैं और विवेक उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन बाकी पेज 8 पर के निदेशक हैं।
अभय सिंह समाजवादी पार्टी की अखिलेश यादव सरकार में फतेहपुर के डीएम थे। बताया जा रहा है कि इस दौरान उन्होंने सारे नियमों को ताक पर रखकर मनमाने ढंग से खनन पट्टे किए। हाई कोर्ट की रोक के बावजूद लोगों को अवैध खनन की रेवड़ी बांटी गई। वह मूल रूप से प्रतापगढ़ के रहने वाले हैं। उन्हें लगभग पांच महीने पहले ही बुलंदशहर का डीएम बनाया गया था। बताया जा रहा है कि आमजगढ़ सीडीओ देवी शरण उपाध्याय तत्कालीन देवरिया के एडीएम थे। उनके यहां से दस लाख रुपए कैश और कई अघोषित संपत्तियों के दस्तावेज बरामद हुए हैं।
अभय सिंह यूपी में चंद्रकला के बाद दूसरे आइएएस अधिकारी है, जिनके खिलाफ सीबीआई ने खनन घोटाले में छापा मारा है। सीबीआई ने जनवरी के पहले हफ्ते में उत्तर प्रदेश और दिल्ली में बालू खनन घोटाले के सिलसिले में कई लोगों के घरों पर छापा मारा था। जिन लोगों के यहां जनवरी में सीबीआइ ने छापा मारा था, उसमें लखनऊ में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी बी चंद्रकला, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) नेता सत्यदेव दीक्षित और सपा एमएलसी रमेश मिश्रा समेत कई अन्य के यहां अवैध बालू खनन मामले में छापा मारा गया था।
गौरतलब है कि 28 जुलाई 2016 को हाई कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआइ ने इस मामले में जांच शुरू की थी। उसने सात प्राथमिक जांच दर्ज की थीं। इनमें से तीन हमीरपुर, शामली और कौशांबी जिलों से जुड़ी जांचों को प्राथमिकियों में तब्दील कर दिया गया। दरसअल साल 2012 में अवैध खनन पट्टों को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी, जिस पर सुनवाई के बाद साल 2013 में अदालत ने आदेश दिया था कि अब कोई भी नया पट्टा नहीं दिया जाएगा और न ही पुराने पट्टों का नवीनीकरण होगा लेकिन इसके बाद भी अवैध खनन का खेल बदस्तूर जारी रहा। इसके बाद साल 2016 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में अवैध खनन को लेकर कई याचिकाएं दाखिल की गईं, जिन पर सुनवाई करते हुए अदालत ने अवैध खनन की जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद यूपी के जिलों फतेहपुर, देवरिया, शामली, सहारनपुर, कौशांबी, हमीरपुर और सिद्धार्थनगर में अवैध खनन के मामले सामने आए थे।
