केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को कहा कि नोटबंदी की सफलता का वास्तविक पैमाना डिजिटल लेनदेन की मात्रा में बढ़ोतरी, कर दायरे का बढ़ना और उच्च मूल्य के नोटों के परिचालन में कमी आना है। रिजर्व बैंक ने कुछ दिन पहले यह खुलासा किया था कि नोटबंदी के बाद 99 प्रतिशत प्रतिबंधित नोट बैंकों में वापस आ गए, जिसके बाद केंद्र सरकार द्वारा नवंबर 2016 में लिए गए इस फैसले की सफलता संदेह के घेरे में आ गई थी।

जेटली ने गुगल के नए डिजिटल भुगतान एप ‘तेज’ को लांच करते हुए यहां कहा, “कुछ जमात में समझ की कमी है और वह नोटबंदी की सफलता केवल इससे मापते हैं कि कितना नोट बैंकों में पहुंचा।”बता दें कि कांग्रेस समेत दूसरी विपक्षी पार्टियां शुरू से ही नोटबंदी का विरोध करती रही हैं। कांग्रेस पार्टी ने अभी पिछले दिनों ही नोटबंदी को सबसे बड़ा घोटाला बताया था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया था।

कांग्रेस ने कहा था कि उच्च मूल्य के नोटों को बंद करने के फैसले को लेकर मोदी ने बार-बार गलत बयान दिए। एक संवाददाता सम्मेलन में वरिसष्ठ कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा था कि प्रधानमंत्री ने अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में कालेधन को लेकर झूठी टिप्पणी की, जिसका खुलासा बीते साल 8 नवंबर को 500 व 1000 रुपये के नोटों की नोटबंदी बाद हुआ है। शर्मा ने कहा कि नोटबंदी से जीडीपी को 2.25 लाख करोड़ रुपये को नुकसान हुआ और इसके लिए प्रधानमंत्री सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं।

नोटबंदी पर पीएम मोदी पर बढ़ते हमले के बीच संघ भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के समर्थन में खड़ा हो हुआ था और नोटबंदी को देश की अर्थव्यवस्था के लिए सही कदम करार दिया था। आरएसएस ने कुछ दिनों पहले कहा था कि नोटबंदी का फायदा देश को तुरंत पता नहीं चलेगा। बल्कि इसका असली फायदा लंबे समय में पता चलेगा। हालांकि संघ के कुछ बड़े पदाधिकारियों ने पहले नोटबंदी को देश के लिए नुकसानदेह बताया था और कहा था कि इससे व्यापारियों को नुकसान पहुंचा है।