केंद्र सरकार के कृषि क़ानूनों के खिलाफ दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर किसानों का आंदोलन पिछले एक महीने से भी ज्यादा समय से जारी है। इसे लेकर सोमवार को सरकार और किसानों के बीच आठवें दौर की बैठक हो रही है। इसी बीच कांग्रेस पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने एमएसपी को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है। राहुल ने कहा कि सरकार किसानों को एमएसपी नहीं दे सकती लेकिन उद्योगपति साथियों को निश्चित मूल्य दे रही है।

राहुल गांधी ने ट्वीट करते हुए कहा, “किसानों को MSP की लीगल गारंटी ना दे पाने वाली मोदी सरकार अपने उद्योगपति साथियों को अनाज के गोदाम चलाने के लिए निश्चित मूल्य दे रही है। सरकारी मंडियां या तो बंद हो रही हैं या अनाज खरीदा नहीं जा रहा। किसानों के प्रति बेपरवाही और सूट-बूट के साथियों के प्रति सहानुभूति क्यूँ?” राहुल के इस ट्वीट पर यूजर्स भी अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

एक यूजर ने लिखा “अमेरिका के 7 सांसदों ने हमारे विदेश मंत्री को पत्र लिखा है कि सरकार किसानों की समस्या को सुलझाए। क्या प्रधामंत्री जी इन पर भी विपक्ष द्वारा भड़काने का इल्जाम लगाएंगे?” एक अन्य यूजर ने लिखा “सूट बूट के साथियो को प्यार और किसान भाइयों पर अत्याचार… आखिर मोदीजी का दिल कब पिघलेगा क्या मेरा अन्नदाता रोज ऐसे ही दम तोड़ता रहेगा।”

एक यूजर ने लिखा “राहुल जी पूरे देश की जनता आज सरकार की जनविरोधी नीतियों से परेशान है देश के युवा, किसान, छात्र, गरीब, मजदुर ओर पीड़ित सब इस सरकार से दुखी है आज किसान ठंड में ठिठुर रहे है लेकिन गूंगी बहरी सरकार के कोई फर्क नही पड़ता कम से कम मानवता के नाते किसानों का दर्द तो समझे ये सरकार!”

बता दें सोमवार को होने वाली चर्चा से पहले भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा है कि किसानों ने यह कानून दिल पर ले लिया है और अब बिल वापसी से कम पर बात नहीं बनेगी। राकेश टिकैत का यह बयान किसानों और सरकार के बीच होने वाली आठवें दौर की बातचीत से ठीक पहले कही है। टिकैत ने कहा कि उम्मीद है कि सरकार बात मान ले, अगर मांगें पूरी नहीं होती तो आंदोलन चलेगा। टिकैत ने कहा कि मीटिंग का एजेंडा रहेगा स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट, तीन कृषि क़ानूनों की वापसी और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर क़ानून बने। हम वापस नहीं जाएंगे। अब तक 60 किसान शहीद हो चुके हैं। सरकार को जवाब देना होगा।