समुद्री तूफान की अब वक्त से पहले सटीक जानकारी मिलेगी। देश के वैज्ञानिकों ने पथ प्रदर्शन और सूचना के लिए गगन इनेवल्ड मेरिनर इंस्टूमेंट (जेमिनी) तैयार किया है। बुधवार को केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने यह उपकरण देश के लिए जारी किया। इसकी मदद से सुनामी, समुद्री तूफान, तेज लहरों की सूचना और तेज हवाओं की सटीक सूचना समुद्र से सटे राज्यों को दी जा सकेंगी। उपकरण को मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत बंगलुरु में तैयार किया गया है।

डॉ. हर्षवर्धन ने बताया कि यह उपकरण सीधे सैटेलाइट से जुड़ा हुआ है। इसका सबसे अधिक लाभ केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों को होगा। इसकी मदद से मछली पालन के लिए संभावित जगहों की जानकारियां भी उपलब्ध होंगी। आम जनता के लिए ये जानकारियां स्थानीय भाषा में उपलब्ध होंगी ताकि उन्हें किसी भी चेतावनी को समझने में कोई परेशानी नहीं हो। उन्होंने बताया कि देश के अत्याधुनिक तंत्र की तारीफ हाल ही में संयुक्त राष्टÑ के एक कार्यक्रम में भी की है।

मंत्रालय के मुताबिक किसी भी समुद्री तूफान के समय में चेतावनी जारी की जाती है। तट से 10-12 किलोमीटर दूर चले जाने की स्थिति में उन्हें जानकारी उपलब्ध कराई जा सकती है। ये मछुआरे 50 समुद्री मील और कई बार मछलियां पकड़ने के लिए 300 समुद्री मील तक जाते हैं। इन्हें संदेश प्रसारित करने में बाधाएं आती है। सैटेलाइट सिस्टम से जुड़ जाने के बाद इनके पास समुद्र में चल रही सभी हलचलों की जानकारियां उपलब्ध रहेंगी।

मंत्रालय जीपीएस ऐडेड जियो औग्मेंटेड नेविगेशन (गगन) और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआइ)की मदद लेगा। गगन प्रणाली में तीन जियो सिंक्रोनस उपग्रह (जीसेट 8, जीसेट 10 और जीसेट 15) शामिल है। गगन फुट प्रिंट में पूरे हिंद महासागर को चौबीस घंटे कवर किया गया है। इसके माध्यम से ही सभी संदेश प्रसारित किए जाएंगे। इस मौके पर पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव, नागरिक उड्डन मंत्रालय सचिव, मछली पालन विभाग के अध्यक्ष और एएआइ अधिकारी भी उपस्थित थे।

क्या है जेमिनी
जेमिनी से आशय ‘गगन इनेवल्ड मेरिनर इंस्टूमेंट’ से है। इसका प्रयोग पथ प्रदर्शन और उससे जुड़ी सूचना पाने के लिए किया जाएगा। इसकी मदद से सुनामी, समुद्री तूफान, तेज लहरों की सूचना और तेज हवाओं की सटीक सूचना समुद्र से सटे राज्यों को दी जा सकेंगी।